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स्‍वामी विवेकानंद जी की 150वीं जयंती के अवसर पर कवि सम्‍मेलन का आयोजन

टीएचडीसी इंडिया लि. के कारपोरेट कार्यालय, ऋषिकेश में हिंदी अनुभाग(का.एवं प्रशा.)के सौजन्‍य से दिनांक 20.03.2013 को स्‍वामी विवेकानंद जी की 150वीं जयंती के अवसर पर भव्‍य कवि सम्‍मेलन का आयोजन किया गया।

 

यह कवि सम्‍मेलन,गंगा भवन परिसर के समीप स्‍थित क्रीड़ा स्‍थल में निगम के अध्‍यक्ष एवं प्रबंध निदेशक,श्री आर.एस.टी.शाई की गरिमामयी उपस्‍थिति में संपन्‍न हुआ। इस अवसर पर निदेशक(तकनीकी),श्री डी.वी.सिंह एवं निदेशक(कार्मिक),श्री एस.के.बिस्‍वास के साथ-साथ अनेक गणमान्‍य व्‍यक्‍तियों ने अपनी उपस्‍थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कवि सम्‍मेलन में देश के विभिन्‍न भागों से कविगणों को आमंत्रित किया गया था। आमंत्रित कवियों में देहरादून से डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, अलीगढ़ से श्री सुरेन्‍द्र सुकुमार, कानपुर से श्री प्रमोद तिवारी, इलाहाबाद से श्रीमती रागिनी चतुर्वेदी, लखीमपुरखीरी से श्री फारूख सरल एवं फैजाबाद से श्री अशोक टाटम्‍बरी ने सम्‍मेलन में भाग लेकर काव्‍य पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन प्रबंधक(हिंदी), श्री अशोक कुमार श्रीवास्‍तव ने किया।

 

सर्वप्रथम महाप्रबंधक(का.एवं प्रशा.), श्री एस.के.अग्रवाल ने सभी आमंत्रित अतिथियों, कविगणों तथा जनसमूह का स्‍वागत करते हुए कवि सम्‍मेलन की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कवि सम्‍मेलन मनोरंजन के साथ-साथ हिंदी के प्रचार-प्रसार में सहयोग करेगा। उन्‍होंने इस प्रकार के आयोजन कराने के लिए हिंदी अनुभाग की प्रशंसा करते हुए कहा कि हिंदी के कार्यान्‍वयन में हिंदी अनुभाग नित नए आयाम स्‍थापित कर रहा है।

 

इसके बाद अध्‍यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, निदेशक(तकनीकी) एवं निदेशक(कार्मिक) तथा वरि. कवि डॉ.बुद्धिनाथ मिश्र एवं श्री एस.सुकुमार ने दीप प्रज्‍जवलित कर काव्‍य संध्‍या का शुभारंभ किया तथा स्‍वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्‍यार्पण किया। इस अवसर पर अध्‍यक्ष एवं प्रबंध निदेशक द्वारा सभी अतिथि कवियों एवं कवयित्री को शॉल ओढ़ाकर सम्‍मानित किया गया।

 

काव्‍य संध्‍या का आगाज करते हुए जहां एक ओर कवियों ने अपनी कविताओं से हास्‍य एवं व्‍यंग्‍य का रंग बिखेरा,वहीं दूसरी ओर से ओजपूर्ण कविताओं से दर्शकों को मंत्रमुग्‍ध कर दिया। सर्वप्रथम प्रयाग इलाहाबाद से आई कवयित्री रागिनी चतुर्वेदी ने '' प्रथम वंदना शारदे मां तुम्‍हारी, सकल सर्जना शारदे मां तुम्‍हारी'' प्रस्‍तुत कर मां सरस्‍वती का महिमागान किया। श्री अशोक टाटम्‍बरी ने ''कोकिल करे पुकार तो समझो बसंत है, भंवरा करे गुंजार तो समझो बसंत है'' के साथ-साथ ''नेता करे लिहाज तो समझो चुनाव है, जब हो नरम मिजाज तो समझो चुनाव है'' रचना प्रस्‍तुत कर वर्तमान राजनीति पर तंज कसे। लखीमपुरखीरी से आए फारुख सरल ने  '' धर्म - जाति का भ्रम मत कीजिए, सबसे पहले मेर सर कलम कीजिए'' प्रस्‍तुतियां देकर दर्शकों की वाहवाही लूटी। अलीगढ़ के सुरेंद्र सुकुमार ने Saffocation (घुटन) जैसी हास्‍य व्‍यंग्‍य कविता का पाठ कर तथा कानपुर के प्रमोद तिवारी ने अपने गीतों एवं गजलों की अद्भुत प्रस्‍तुति देकर श्रोताओं की वाहवाही लूटी। मंच का संचालन कर रहे डॉ. बुद्धिनाम मिश्र ने अंत में अपना काव्‍य पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्‍ध कर दिया।

 

कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम का संचालन कर रहे प्रबंधक (हिंदी),श्री अशोक कुमार श्रीवास्‍तव द्वारा धन्‍यवाद ज्ञापित किया गया जिसमें उन्‍होंने उपस्‍थित मुख्‍य अतिथियों, कविगण, श्रोताओं, मीडिया कर्मियों तथा कार्यक्रम को संपन्‍न बनाने में सहयोग देने वाले सभी कर्मियों/विभागों के प्रति आभार व्‍यक्‍त करते हुए कार्यक्रम समापन की घोषणा की।

 
             
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