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गैरी-हलेथ (प्रतापनगर) में CSR के माध्यम से स्वास्थ्य शिविर का अयोजन

CSR के अन्तगर्त सेवा-टीएचडीसी द्वारा रिम एरिया में प्रतापनगर ब्लाक के गैरी-हलेथ में एक स्वास्थ्य शिविर दिनांक 20.03.14 को आयोजित किया गया। कार्यक्रम को श्री कृष्ण सेवा आश्रम, ऋषिकेश के डा. बशिष्ठ और प्रबन्धक (सामाजिक) टिहरी श्री एस.डी. उनियाल ने सयुंत रूप से किया। गैरी-हलेथ नई टिहरी से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

     इस क्षेत्र में चिकित्सा सेवाओं का अभाव होने के कारण ग्रामीण जनता को चिकित्सा सेवाऐं प्रदान करने के लिए इस तरह का आयोजन किया जाना बहुत जरूरी था। चिकित्सा शिविर में फिजिशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञों ने अपनी सेवायें प्रदान की, चिकित्सा जांच के दौरान स्वास्थ्य शिविर में 76 पुरूष और 212 महिला और बच्चें मरीजों की जांच के उपरान्त उन्हें निशुल्क दवाईयां भी वितरित की गयी। चिकित्सा शिविर में हलेथ, गैरी राजपूतों की, क्यार्की, गोदड़ी, कोरदी, सिल्यारी अदि गांव के ग्रामीणों ने शिविर से लाभ लिया।

     सेवा-टीएचडीसी द्वारा इस वर्ष रिम एरिया में भारत सरकार के उर्जा मंत्रालय के साथ हुऐ एमओयू के अनुपालन में 12 चिकित्सा जांच शिविर और 06 नेत्र चिकित्सा शिविर का अयोजन किये जाने थे, जिसे सीएसआर युनिट टिहरी ने गैरी-हलेथ में अन्तिम शिविर आयोजित कर लक्ष्य पूरा कर दिया है।

    चिकित्सा शिविर में जन सम्पर्क अधिकारी (सामाजिक) श्री यतबीर सिंह चौहान गैरी-हलेथ क्षेत्र श्री गोविन्द सिंह,श्री बलबीर सिंह, श्री आशाराम नेगी, श्रीमति सोनी भण्डारी सहित कई ग्रामीण उपस्थित थे। सेवा-टीएचडीसी द्वारा किये जा रहे कार्यो के लिए ग्रामीणों ने आभार ब्यक्त किया। और भविष्य इस विकट क्षेत्र में चिकित्सा सेवायें आगे भी किये जाने का अनुरोध किया। स्वस्थ्य परिक्षण के दौरान ग्रामीणों को विभिन्न बीमारियो ंजैसे एड्स और सक्रमंण बीमारियों से बचाव के बारे में ग्रामीणों जो जानकारी दी गयी।

 

     स्वस्थ्य शिविर के दौरान ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार उन्होंने अपनी और अपने क्षेत्र की बहुत सी समस्याओं को समाने रखा और सेवा-टीएचडीसी से सहयोग के लिए अग्रह किया, जिनको विन्दुवार दिया गया है-

·         ग्रामीणों ने बताया कि इस क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या चिकित्सा की है, यहां पर प्रत्येक महिने एक चिकित्सा शिविर आयोजित किये जाने की मांग की, यहां पर 108 इमरजेंशी बाली चिकित्सा वाहन भी बहुत मुश्किल से पंहुच पाती है।

  • वेसिक शिक्षा में सुधार के लिए इस क्षेत्र में ठोस कार्य करने ग्रामीणों ने बहुत ही विन्रम निवेदन किया।
  •  वागवानी फसलों को बढ़ावा देने के लिए सहयोग की मांग की जिसका कि व्यवसायिक स्तर बढ़ावा दिया जा सके।
  • इस सूदूर क्षेत्र में युवाओं और महिलाओं के उत्थान के लिए ग्रामीणों ने कम्प्यूटर प्रशिक्षण, सिलाई और स्वेटर बुनाई प्रशिक्षण, और कच्चे माल से अचार एवं अन्य सामग्री निर्माण हेतु प्रशिक्षण दिये जाने का अनुरोध किया।
  • ग्रामीणों ने बताया कि यहां पर अदरक हल्दी, मटर, धनिया, प्याज, लसुहन की खेती बहुत होती है, लेकिन व्यवसायिक स्तर करने के लिए बाजार का अभाव है।
  • स्कूल बच्चों को बैठने के लिए इण्टर कालेज में फर्नीचर और कम्प्यूटर दिये जाने की मांग की।

 
             
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