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कवि सम्मेरलन का आयोजन

टीएचडीसी इंडिया लि., कारपोरेट कार्यालय, ऋषिकेश में हिंदी अनुभाग(का.एवं प्रशा.) के सौजन्‍य से 20 मार्च, 2013 को गंगा भवन के समीप क्रीड़ा स्‍थल में भव्‍य कवि सम्‍मेलन का आयोजन किया गया। यह कवि सम्‍मेलन निगम के अध्‍यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री आर.एस.टी.शाई की गरिमामयी उपस्‍थिति में संपन्‍न हुआ। इस अवसर पर निगम के निदेशक (तकनीकी), श्री डी.वी.सिंह, निदेशक(कार्मिक), श्री एस.के.बिस्‍वास एवं निदेशक(वित्‍त), श्री श्रीधर पात्र ने भी अपनी उपस्‍थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कवि सम्‍मेलन में काव्‍य पाठ करने के लिए देहरादून से डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, लखनऊ से श्री सूर्य कुमार पांडेय, दिल्‍ली से डॉ. ममता किरण,  कानपुर से श्री विनोद श्रीवास्तव एवं डॉ. कमलेश द्विवेदी को आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम का संचालन वरि.प्रबंधक(हिंदी), श्री अशोक कुमार श्रीवास्‍तव ने किया। निगम के अध्‍यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, निदेशक (तकनीकी), निदेशक(कार्मिक), निदेशक(वित्‍त) एवं महाप्रबंधक(का.एवं प्रशा.),श्री एस.के.अग्रवाल तथा कविगणों की ओर से डॉ बुद्धिनाथ मिश्र ने दीप प्रज्‍जवलित कर कवि सम्‍मेलन का विधिवत उद्घाटन किया। अध्‍यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने शॉल औढाकर सभी कविगणों का स्‍वागत किया।

 

इसके साथ ही कवि सम्‍मेलन का शुभारंभ हुआ जिसमें जहां एक और कवियों ने अपनी कविताओं से हास्‍य एवं व्‍यंग्‍य का रंग बिखेरा वहीं दूसरी ओर अपनी ओजपूर्ण कविताओं से दर्शकों को मंत्रमुग्‍ध कर दिया। डॉ. कमलेश द्विवेदी ने व्‍यंग्‍य की फुहारों से कवि सम्‍मेलन की शुरूआत की । उन्‍होंने अपनी कविता 'चार किताबें पढ़कर खुद को टॉप समझता है, मेरा बेटा खुद को मेरा बाप समझता है' से बच्‍चों पर आधुनिकता के प्रभाव पर कटाक्ष किया। कानपुर के विनोद श्रीवास्तव ने 'धर्म बड़े-बड़े नहीं होते, जानते तो लड़े नहीं होते, चोट तो फूलों से भी लगती है, सिर्फ पत्‍थर ही कड़े नहीं होते' कविता से देश दुनिया में फैले धार्मिक उन्‍माद पर प्रहार किया। डॉ. ममता किरण ने भ्रूण में बेटियों की हत्‍या पर एक मां की पीड़ा को व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि ' सारी दुनिया के सवालों से बचा लूं तुमको, अपने दिल के किसी कोने में छूपा लूं तुमको, एक निर्णय भी नहीं मेरे हाथ में बेटी, कोख मेरी है मगर कैसे बचा लूं तुमको। कवि बुद्धिनाथ मिश्र ने 'सांसों के गजरे कुम्‍हलाएं , आप न आए' से प्रेमी के मन की थाह ली रचना प्रस्‍तुत की। लखनऊ के श्री सूर्य कुमार पांडेय ने 'पुराना कुकर कहीं सीटी बजाना छोड़ देता है' प्रस्‍तुत कर अपनी कविता से उम्र के फासलों को कम किया। कार्यक्रम के अंत में वरि.प्रबंधक (हिंदी), श्री अशोक कुमार श्रीवास्‍तव ने उपस्‍थित विशिष्‍ट अतिथियों, कविगणों एवं श्रोताओं का उनकी उपस्‍थिति के लिए धन्‍यवाद एवं आभार व्‍यक्‍त किया।

 

 

 
             
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