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टीएचडीसी इंडिया लि., कारपोरेट कार्यालय, ऋषिकेश में 16 मई, 2015 को भव्‍य कवि सम्‍मेलन का आयोजन

टीएचडीसी इंडिया लि., कारपोरेट कार्यालय, ऋषिकेश में हिंदी अनुभाग (का.एवं प्रशा.) के सौजन्‍य से 16 मई, 2015 को ओपन एयर थियेटर (गंगा भवन के पीछे) में भव्‍य कवि सम्‍मेलन का आयोजन किया गया। यह कवि सम्‍मेलन निगम के अध्‍यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री आर.एस.टी.शाई की गरिमामयी उपस्‍थिति में संपन्‍न हुआ। इस अवसर पर निगम के निदेशक(कार्मिक), श्री एस.के.बिस्‍वास ने अपनी उपस्‍थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। निदेशक(कार्मिक) एवं महाप्रबंधक(का.एवं प्रशा.),श्री एस.के.अग्रवाल ने शॉल औढाकर सभी आमंत्रित अतिथि कविगणों तथा कवियित्री का स्‍वागत किया। कार्यक्रम का संचालन हिंदी अधिकारी, श्री पंकज कुमार शर्मा ने किया।

 

आमंत्रित कवियित्री डॉ. रंजना राय के द्वारा मां शारदा की वंदना के साथ कवि सम्‍मेलन का शुभारंभ हुआ। कवि सम्‍मेलन में जहां एक ओर कवियों ने अपनी कविताओं से हास्‍य एवं व्‍यंग्‍य का रंग बिखेरा, वहीं दूसरी ओर अपनी ओजपूर्ण कविताओं से दर्शकों को मंत्रमुग्‍ध कर दिया।  सर्वप्रथम लखनऊ से आए कवि श्री वाहिद अली वाहिद ने साम्‍प्रदायिक सौहार्द की अपनी रचना, '' रहमान बनो तो रमो रब में, वह कर्म करो कि महान बनो, जो महान बनो तो समुद्र झुके, तुम वीर बली हनुमान बनो।'' से दर्शकों/श्रोताओं की खूब तालियां बटोरी। इलाहबाद से आए श्री जय कृष्‍ण तुषार ने अपनी काव्‍य रचना ''सूखे में कहीं बाढ़ में फसलें थी धान की, फिर भी नोटिस लाए हैं, अमीन लगान के'' से हमारी व्‍यवस्‍था पर तंज कसें। बाराबंकी से आए हास्‍य व्‍यंग्‍य के कवि श्री विकास बौखल ने '' इस मंहगाई में कन्‍हैया जो आए कहीं, सच कहता हूं रोटी दाल मार डालेगी, रथ न मिला तो नैनो कार में चलेंगे आप, ब्रेकरों की राह में उछाल मार डालेगी'' जैसी रचनाओं से हास्‍य और व्‍यंग्‍य का रस बिखेरा। वाराणसी से आई डॉ रंजना राय ने '' भगीरथी को तपस्‍या में तो भीखम को बपौती में, प्रलय की धार लेकर मिली शिव को चुनौती में, मिली सबको सहजता से जो इसके घाट आया, मगर रविदास ने पाया गंगा को कठौती में'' जैसी अपनी काव्‍य रचनाओं से श्रोताओं को मंत्र मुग्‍ध कर दिया। गाजीपुर से आए श्री हरि नरेन हरीश ने ''जब-जब सच को झूठ बताया जाएगा, यहां तब-तब महाभारत दोहराया जाएगा'' जैसी अपनी ओजपूर्ण कविता से आज के समाजिक परिवेश पर दर्शकों को सोचने पर विवश कर दिया। देहरादून से आए डॉ बुद्धिनाथ मिश्र जी ने अपनी चिर-परिचित शैली में ''चाहे किसी घूंघट वाली के हाथों का दर्पण बन जांऊ'' जैसी श्रृंगार रस की कविता से श्रोताओं को मंत्र मुग्‍ध कर दिया।     

       

कार्यक्रम के अंत में हिंदी अधिकारी, श्री पंकज कुमार शर्मा ने उपस्‍थित विशिष्‍ट अतिथियों, कविगणों एवं श्रोताओं का उनकी उपस्‍थिति के लिए धन्‍यवाद एवं आभार व्‍यक्‍त किया।

 

 

 
             
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