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As on June 2015

टिहरी बांध तथा एचपीपी (1000 मे.वा.)

(प्रचालनाधीन)

टिहरी बांध एवं एचपीपी (1000 मे.वा.) में, विश्व में अपनी तरह के सबसे ऊंचे बांधों में से एक 260.5 मी. ऊंचा मिट्टी पत्थर पूरित बांध, 15540 क्यूमेक्स के पीएमएफ एवं 220 मी. के गिराव के लिए परिकल्पित स्पिलवे सिस्टम जिसमें एक स्यूट स्पिलवे और 04 शाफ्ट स्पिलवे हैं तथा एक भूमिगत विद्युत गृह, जिसमें 250 मेगावाट प्रत्येक क्षमता की 04 टरबाइन/जनरेटर सैट, जो 90 मी. के शीर्ष परिवर्तन के साथ प्रचालन के लिए परिकल्पित है, शामिल हैं।

 

परियोजना 2006-07 में कमीशन की गई थी तथा टिहरी विद्युत केंद्र की सभी 04 मशीनें वाणिज्यिक प्रचालनाधीन है। उत्तरी ग्रिड को आवश्यकता से अधिक विद्युत उपलब्ध कराने के अतिरिक्‍त परियोजना से कमांड क्षेत्र सिचाई लाभ प्राप्त कर रहा है तथा दिल्ली और उत्तर प्रदेश को पेयजल की आपूर्ति की जा रही है।

 

1.0       परियोजना की कमीशनिंग

 

सभी चार यूनिटें (यूनिट-IV, यूनिट-III, यूनिट-II एवं यूनिट-I) क्रमशः जुलाई,06, अक्टू,06, जनवरी,07 एवं मार्च,07 में उत्तरी ग्रिड से सिंक्रोनाइज कर दी गई थीं और क्रमशः 22 सितंबर,06, 09 नवंबर,06, 30 मार्च,07 एवं 09 जुलाई,07 से वाणिज्यिक प्रचालन में है।

 

2.0 उत्पादन

टिहरी विद्युत केंद्र से गत वर्षों के लिए विद्युत उत्पादन के विवरण निम्नानुसार है-

 

क्र.सं.

वर्ष

उत्पादन

लक्ष्य (मि.यू.)

उपलब्धियां (मि.यू.)

1

2006-07

888.00

891.37

2

2007-08

2649.00

2663.58

3

2008-09

2649.00

3164.23

4

2009-10

2850.00

2116.79

5

2010-11

2797.00

3116.03

6

2011-12

2797.00

3983.65

7

2012-13

3000.00

3101.99

8

2013-14

2797.00

4060.43

9

2014-15

2900.00

3004.01

 

कुल

23327.00

26102.08

 

टिहरी एचपीपी से चालू वित्‍तीय वर्ष 2015-16 के लिए उत्पादन का विवरण निम्नानुसार है-

 

क्र.सं.

माह

उत्पादन

लक्ष्य (मि.यू.)

उपलब्धियां (मि.यू.)

1

अप्रैल-15

198.07

206.79 

2

मई-15

185.27

235.21

 

कुल

(वित्‍तीय वर्ष 2015-16 हेतु लक्ष्‍य 2920 मि.यू.)

 

 

 

 

 

 

3.0 पूर्णता लागत

 

परियोजना की अनुमोदित पूर्णता लागत आईडीसी एवं माध्यस्थम अवार्ड/अदालती मामलों आदि के लिए आकस्मिक देनदारियां, वास्तविक लेकिन 967.38 करोड़ रू. से अधिक नहीं, को शामिल करते हुए 8392.45 करोड रू. है।

 

4.0 प्रशुल्क

 

2006-09 की अवधि के लिए माननीय केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (सीईआरसी) द्वारा 16.04.2013 को प्रशुल्क अनुमोदित कर दिया गया है। टीएचडीसी इंडिया लि. ने 29.05.2014 को एक याचिका दायर की है। माननीय सीईआरसी ने 2006-09 की अवधि के लिए अपने पत्र दि. 05.06.2014 के द्वारा एएफसी को 19.59 करोड़ रू. से उपर पुनरीक्षित कर दिया है। 2009-14 की अवधि के लिए प्रशुल्क माननीय सीईआरसी द्वारा 27.01.2015 को जारी कर दिया गया है।

 

कोटेश्वर एचईपी (400 मे.वा.)

(प्रचालनाधीन)

कोटेश्वर जल विद्युत परियोजना (400 मे.वा.) टिहरी से 22 कि.मी. डाउनस्ट्रीम में स्थित भागीरथी नदी की जल विद्युत विभव के विकास के लिए बनाए जा रहे टिहरी पावर काम्पलैक्स जिसमें टिहरी बांध एवं एचपीपी (1000 मे.वा.), टिहरी पीएसपी (1000 मे.वा.) एवं कोटेश्वर एचईपी (400 मे.वा.) शामिल है, का अभिन्न अंग है। यह उत्तरी ग्रिड में बड़े ऊर्जा संयत्र टिहरी पावर काम्पलैक्स के कार्य संपादन को सुकर बनाएगा। कोटेश्वर बांध द्वारा निर्मित जलाशय 35.0 एमसीएम वास्तविक भंडारण क्षमता का है जो टिहरी पीएसपी के लिए निचले (संतुलित) जलाशय की तरह भी कार्य करेगा। यह परियोजना सिंचाई कार्यों के लिए टिहरी जलाशय से नियंत्रित मात्रा में पानी छोड़ने का कार्य भी कर रही है।

 

भारत सरकार ने कोटेश्वर जल विद्युत परियोजना (4x100 मे.वा.) के कार्यान्वयन के लिए अप्रैल,2000 में अक्टूबर,1999 के मूल्य स्तर पर 190.04 करोड़ रूपए की आईडीसी सहित 1301.56 करोड़ रूपए की लागत पर मंजूरी दी थी। समय एवं लागत वृद्धि पर बनी स्थाई समिति ने 18 जुलाई, 2012 को आयोजित हुई अपनी बैठक में निर्णय लिया था कि टीएचडीसीआईएल पूर्वानुमानित पूर्णता लागत को समाविष्ट करते हुए अद्यतन की गई आरसीई प्रस्तुत करेगी। सीईए ने दिनांक 09.10.13 के पत्र के द्वारा मार्च, 12 के मूल्य स्तर पर 383.88 करोड़ रू. की आईडीसी एवं एफसी सहित 2558.79 करोड़ रू. की आरसीई अनुमोदित कर दी है।

 

परियोजना का सामान्य रेखाचित्र प्रदर्श- पर संलग्न है।

 

1.0       परियोजना की कमीशनिंग

 

सभी चार इकाईयां (इकाई-I, इकाई-II, इकाई-III, इकाई-IV) क्रमशः मार्च,11, मार्च,11, जनवरी,12 एवं मार्च,12 में उत्तरी ग्रिड से जोड़ दी गई थी तथा क्रमशः 01 अप्रैल,11, 26 अक्टूबर,11, 13 फरवरी,12 एवं 01 अप्रैल,12 से वाणिज्यिक प्रचालन में हैं।

 

2.0       उत्पादन

 

कोटेश्वर एचईपी से उत्पादन के विवरण निम्नानुसार हैं।

 

क्र.सं.

अवधि

उत्पादन

लक्ष्य (मि.यू.)

उपलब्धियां (मि.यू.)

1

2011-12

537.00

607.60

2

 2012-13

1145.00

1164.05

3

2013-14

1155.00

1521.83

4

2014-15

1170.00

1210.17

 

कुल

4007.00

4503.65

 

 

कोटेश्वर एचईपी से चालू वित्‍तीय वर्ष 2015-16 के लिए उत्‍पादन का विवरण निम्नानुसार हैं।

 

क्र.सं.

माह

उत्पादन

लक्ष्य (मि.यू.)

उपलब्धियां (मि.यू.)

1

अप्रैल-15

92.47

  93.48 

2

मई-15

95.96

115.77

 

कुल

(वित्‍तीय वर्ष 2015-16 हेतु लक्ष्‍य 1180 मि.यू.)

 

 

 

 

3.0       चल रहे कार्यों की प्रगति:

 

·         व्‍यावर्तन सुरंग में एग्रीगेट स्‍ल्‍यूसड के शीर्ष के बीच में और 620.00 मी. प्‍लेटफार्म से 32 नं. लंबा व्‍यास छेदों में से 17 नं. के माध्‍यम से टनल लाइनिंग ग्राउट सामग्री के साथ खाली जगह को भरने का कार्य शुरू किया गया है। 11 नं. छेदों में से सेचुरेशन प्राप्‍त कर लिया गया है।

·         बायां भाग में व्‍यावर्तन सुरंग को बांध शीर्ष से 620 ई.एल. के साथ करटेन ग्राउटिंग का कार्य शेष 50 नं. छेदों में से 27 नं. में कार्य प्रगति पर है।

·         ई.एल. 635.00 मी. से व्‍यावर्तन सुरंग तक एक्‍सिस एडिट समानांतर की खुदाई कार्य लगभग 17 मी. लंबाई के संचयी प्रगति के साथ 9.5 मी. में पूरी कर दी गई है।

·         व्‍यावर्तन सुरंग आउटलेट के नजदीक बांए भाग के पहाड़ी ढलानों की सुदृढ़ीकरण के लिए, 15 मी. और 9 मी. लंबाई के दो ब्‍लॉकों में कंक्रीट रिटेनिंग वॉल का निर्माण कार्य प्रगति पर है। अगले ब्‍लॉक के रिटेनिंग वॉल के लिए खुदाई का कार्य भी प्रगति पर है।

·         विद्युत गृह के प्रमुख प्रवेश सुरंग में ड्रैनेज हॉल्‍स की ड्रिलिंग प्रगति पर है।

·         व्‍यावर्तन सुरंग आउटलेट के ऊपरी क्षेत्र में ढलान के सुदृढ़ीकरण के लिए लगभग 45 मी. लंबा कंक्रीट क्‍लेडिंग वॉल का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है।

·         दाएं भाग में डम्‍पड मक पाइल्‍स के उपचार के लिए सुदृढ़ीकरण कार्य की खुदाई के लिए अप्रोच का निर्माण कार्य प्रगति पर है।

·         ई.एल. 590 वर्ग पर कंक्रीट लाइनिंग और सेन नाला सीपेज का कार्य प्रगति पर है।

 

4.0     परियोजना पर खर्च:

 

निगम द्वारा मई, 2015 तक कोटेश्वर जल विद्युत परियोजना पर 2751.56 करोड़ रू. खर्च किए गए। इसमें 383.88 करोड़ रूपए की आईडीसी एवं एफसी शामिल है।

 

5.0     बजट प्राक्कलन बनाम खर्च

 

कोटेश्‍वर एचईपी पर मई,2015 के दौरान 5.37 करोड़ रू. के पुनरीक्षित बजट अनुमान की तुलना में 2.33 करोड़ रू. का व्यय किया गया है।

 

6.0      प्रशुल्क

 

माननीय सीईआरसी के दिनांक 15.05.2014 के आदेश के अनुसार अब अनंतिम रूप से प्रशुल्क प्रभारित किया जा रहा है। माननीय सीईआरसी ने 2011-14 की अवधि के लिए एएफसी का निर्धारण करते समय केंद्र की सीओडी के अनुसार पूंजीगत लागत के 85 प्रतिशत पर विचार किया है।

 

 

 

टिहरी पम्प स्टोरेज संयत्र (1000 मे.वा.)

1.0       पृष्ठभूमि

 

टिहरी पीएसपी में 250 मे.वा. प्रत्येक यूनिटों की 04 रिवर्सीबल पम्प टरबाइन सहित भागीरथी नदी के बाएं किनारे पर एक भूमिगत मशीन हॉल का निर्माण सम्मिलित होगा। परियोजना की मुख्य विशेषता अधिकतम एवं न्यूनतम शीर्ष के बीच लगभग 90 मी. का बड़ा अंतर है, जिसके नीचे रिवर्सीबल यूनिटें परिचालित होगी। टिहरी पम्प स्टोरेज संयंत्र का प्रचालन ऊपरी जलाशय से निचले जलाशय में निस्तारित जल के पुनर्चक्रण की संकल्पना पर आधारित है। टिहरी बांध जलाशय ऊपरी जलाशय तथा कोटेश्वर जलाशय निचला संतुलक जलाशय के रूप में कार्य करेंगे।

 

इसके पूर्ण होने पर उत्तरी क्षेत्र को 1000 मे.वा. (1268 मि.यू. का वार्षिक उत्पादन) की अतिरिक्‍त पीकिंग पावर, उत्पादन क्षमता, में वृद्धि हो जाएगी। ऑफ पीक आवर्स के दौरान रिवर्सीबल यूनिटों की पंपिग प्रचालन के लिए ऑफ पीक ऑवर के दौरान अधिकतम 1000 मे.वा. की आवश्यकता तक सीमित 1712 मि.यू. ऊर्जा की आवश्यकता होगी। टिहरी पीएसपी के निर्माण के साथ ही, टिहरी हाइड्रो पावर कॉम्पलेक्स 2400 मे.वा. की संस्थापित क्षमता के साथ प्रमुख पीकिंग स्टेशन के रूप में कार्य करेगा।

 

2.0       परियोजना अनुमोदन

 

भारत सरकार ने पम्प स्टोरेज संयत्र (4 x 250 मे.वा.) के निर्माण के लिए जुलाई, 2006 में 70:30 ऋण इक्विटी अनुपात के साथ दिसम्बर,2005 के मूल्य स्तर पर 81.64 करोड़ रू. की आईडीसी सहित 1657.60 करोड़ रू. की लागत का अनुमोदन किया है।

 

3.0       पुनरीक्षित लागत प्राक्‍कलन

 

सीसीईए ने नवंबर, 11 में अप्रैल, 10 के मूल्य स्तर पर 405.04 करोड़ रूपए की आईडीसी सहित 2978.86 करोड़ रूपए की राशि के परियोजना के पुनरीक्षित लागत प्राक्कलन (आरसीई) को अनुमोदित किया है।

 

4.0       परियोजना स्थिति

 

टिहरी पीएसपी परियोजना का ले-आउट प्रदर्श-।। पर संलग्न है।

 

4.1       ईपीसी संविदा अवार्ड करने से पूर्व निष्‍पादित किए गए कार्य

 

टिहरी पीएसपी के आवश्यक कार्य टिहरी चरण-। के निष्‍पादन के साथ ईपीसी संविदा अवार्ड करने से पूर्व पहले ही निम्नानुसार पूर्ण कर दिए गए हैं:

 

·                     पीएसपी के लिए दो हेडरेस सुरंगें

·                     पीएसपी की हेडरेस सुरंगों के लिए इनटेक

·                     टिहरी चरण-। के तहत निर्मित ट्रांसफार्मर हॉल को पीएसपी के लिए जनरेटर ट्रांसफार्मर लगाने के लिए भी नियोजित कर दिया गया है।

·                     मुख्य केबल गैलरी

·                     इण्टरफेस सुविधा (सिविल कार्य)

·                     ई.एल. 622.0 मी. के स्‍तर तक टीआरटी आउटलेट के सामने प्रतिरक्षा दीवार।

·                     पीएसपी कार्यों से टिहरी एचपीपी की अप्रोच अलग करने हेतु मशीन हॉल, डाउनस्‍ट्रीम सर्जशाफ्ट एवं लिंक साफ्टों को जोड़ने के लिए विभिन्‍न एडिट्स का उत्‍खनन।

 

5.0 प्रमुख कार्य

 

·         परियोजना के प्रमुख कार्यों को एकल टर्नकी ईपीसी संविदा के माध्यम से निष्‍पादित किया जा रहा है। परियोजना की ईपीसी/टर्नकी निष्पादन के लिए मैसर्स अल्सटॉम हाइड्रो फ्रांस एवं मैसर्स हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी लि. के संयुक्‍त संघ के साथ 27 जुलाई, 2011 को करार पर हस्ताक्षर हो गए हैं। परियोजना पर कार्य 27जुलाई,2011 से शुरू हो गया है और कार्य पूर्ण होने का समय 54 माह है।

 

6.0      सिविल कार्य:

 

6.1     अप्रोच एडिट्स एवं ड्रेनेज गैलरियों का निर्माण :

 

·         सभी प्रवेश एडिट्स और ड्रेनेज गैलरियों की डिजाइन एवं ड्राइंग्‍स जारी हो गई हैं।

·         विभिन्‍न ढांचों की 13 प्रवेश एडिट्स (कुल 2106 आरएम) पूरी हो गई हैं।

·         विभिन्‍न ढांचों की ड्रेनेज गैलरियों के प्रमुख भाग (कुल 1462.10 आरएम) पूरे हो गए हैं।

 

6.2     अपस्‍ट्रीम सर्ज शाफ्ट (3 एवं 4)

 

·         अपस्‍ट्रीम सर्ज शाफ्ट शीर्ष चैम्‍बर्स तथा वर्तमान एचआरटी के ग्राउटिंग विवरण के साथ-साथ इसकी ग्राउटिंग गैलरियों के उत्‍खनन एवं सपोर्ट  जनरल अरेंजमेंट, प्‍लान, एल-सेक्‍शन, के लिए डिजाइन एवं ड्राइंग्‍स जारी कर दी गई हैं। 

·         अपस्‍ट्रीम सर्ज शाफ्ट (एचआरटी-3 एवं 4) में पाइलेट शाफ्ट का उत्‍खनन (कुल लंबाई 280 मी.) पहले ही पूर्ण कर लिया गया है।

·         अपस्‍ट्रीम सर्जशाफ्ट -3 के उपरी चैम्‍बर्स के चारो और दो ग्राउटिंग सह ड्रेनेज गैलरियों, जो एक चैम्‍बर के शीर्ष तक पहुंचती है और दूसरी चैम्‍बर के तल तक पहुंचती है, का उत्‍खनन प्रगति पर है और क्रमश: 85 आरएम में से 60 आरएम तथा 88 आरएम में से 19.2 आरएम की लंबाई में पूरी कर ली गई है। 

·         शीर्ष चैम्‍बरअपस्‍ट्रीम सर्जशाफ्ट 3 की शलेसिंग का कार्य केवल चैम्‍बर के शीर्ष में ग्राउटिंग गैलरी में उत्‍खनन के बाद के बाद ही किया जा सकता है।

·         चैम्‍बर के शीर्ष तक जाने वाली अपस्‍ट्रीम सर्ज शाफ्ट-4 के उपरी चैम्‍बर के चारों ओर एक ग्राउटिंग सह ड्रेनेज गैलरी का उत्‍खनन भी प्रगति पर है और कुल 151 आरएम में से 55.5 आरएम लंबाई में पूरा कर लिया गया है।

·         शीर्ष चैम्‍बर का सलेसिंग- अप-स्‍ट्रीम सर्ज शाफ्ट-4 प्रगति पर है और कुल 3750 क्‍यूमेक में से 2300 क्‍यूमेक पूरा हुआ है।    

 

6.3     बटरफ्लाई वॉल्‍व चेम्‍बर (बीवीसी) :

 

·         पीएसी के शीर्ष कटाव और बटर फ्लाई वॉल्‍व चैम्‍बर बैंचिंग पहली बैंच के लिए के इन्‍स्‍ट्रूमेंटेशन एवं निगरानी सहित उत्‍खनन एवं सपोर्ट के लिए डिजाइन एवं ड्राइंग्‍स जारी कर दी गई हैं।

·         बटर फ्लाई वॉल्‍व चेम्‍बर (बीवीसी) का शीर्ष कटाव पहले ही पूरा हो गया है।

·         बीवीसी के अपस्‍ट्रीम में ड्रनेज गैलरी का उत्‍खनन, कुल लंबाई 156 आरएम में भी पूरी हो गई है।

·         उपरोक्‍त ड्रनेज गैलरी में कुछ खराब भूगर्भ दशाएं, विरूपण पाए गए थे इसलिए, आगे की बेंचिंग के लिए ड्रेनेज गैलरी के उपचार की आवश्‍यकता है तथा इसे पूरा कर लिया गया है। ड्रेनेज गैलरी और बीवीसी के मध्‍य रॉक एंकर संस्‍थापन का कार्य पूरा होने वाला है। अतिरिक्‍त सहायक उपायों के रूप में  बीवीसी के क्रॉउन में  रॉक बोल्‍ट के संस्‍थापन का कार्य प्रगति पर है। एमपीबीएक्‍स औजारों का संस्‍थापन भी प्रगति पर है। 

·         उसके बाद बीवीसी की बेंचिंग जून-15 के तीसरे सप्‍ताह में की जाएगी।

 

6.4   पेनस्टॉक असेम्बली चैम्बर(पीएसी):-

 

·       खुदाई और सपोर्ट के लिए डिजाइन एवं ड्राइंग सहित क्राउन सलेसिंग की इंसट्रुमेंशन एवं मानीटरिंग पूरी कर दी गई है।

·       पैनस्‍टॉक असेम्‍बली चैम्‍बर (पीएसी) के क्राउन श्‍लेसिंग का कार्य पूर्ण हो गया है। बीवीसी की दो बैचों का उत्‍खनन पूर्ण होने के बाद पीएसी में बैंचिंग शुरू की जाएंगी। 

 

 

 

6.5  पैनस्‍टॉक्‍स :

 

·         निचले पैनस्‍टॉक चैम्‍बर, निचले क्षैतिज पैनस्‍टॉक्‍स, निचले क्षैतिज पैनस्‍टॉक वर्टिकल बेंड, विद्युत गृह कैवर्न के साथ निचले क्षैतिज पैनस्‍टॉक यूनिट-8 जंक्‍शन, पीएसी और बीवीसी के मध्‍य उपरी क्षैतिज पैनस्‍टॉक के इन्‍स्‍ट्रूमेंटेशन एवं निगरानी सहित उत्‍खनन एवं सहायता के लिए डिजाइन एवं ड्राइंग्‍स जारी कर दी गई हैं।

·         निचले पेनस्‍टॉक चैम्‍बर का उत्‍खनन पहले ही पूर्ण हो गया है।

·         सभी चार निचले क्षैतिज पैनस्‍टॉक्‍स पी-5, पी-6, पी-7 एवं पी-8 का उत्‍खनन पूर्ण हो गया है। केवल मशीन हॉल की तरफ से 30 मी. लंबी खुदाई की जानी है।

·         वर्टिकल पैनस्‍टॉक पी-5 (135 मी.) के पाइलेट शॉफ्ट का उत्‍खनन पूर्ण हो गया है।

·         पी-6 एवं पी-7 में पायलेट शॉफ्ट का उत्‍खनन प्रगति पर है और 135 मी. प्रत्‍येक में से क्रमश: 118 आरएम और 85 आरएम तक पूरा कर लिया गया है।      

 

6.6  बसबार चैम्‍बर  :

 

·      बसबार चैम्‍बर, उपरी क्षैतिज गैलरियों और बसबार शाफ्ट के उत्‍खनन और सपोर्ट के लिए डिजाइन और ड्राइंग्‍स जारी कर दी गई हैं। एडिट 3ए में स्‍थित बसबार टनल के लिए सपोर्ट व्‍यवस्‍था महीने के दौरान जारी कर दी गई है।

·      बसबार चैम्‍बर का उत्‍खनन (कुल 92 मी. लंबाई) पूर्ण कर लिया गया है।

·      बसबार गैलरी- 5,6, एवं 7 का उत्‍खनन भी प्रगति पर है और क्रमश: 87.4 आरएम में से 41.5 आरएम, 107.10 आरएम में से 50 आरएम,  तथा 108.70 आरएम में से 91.5 आरएम पूर्ण कर लिया गया है। बसबार गैलरी नं. 8 पहले ही पूरा कर दिया गया है (कुल लंबाई 113.10 आरएम) ।

·      बसबार वर्टिकल शाफ्ट 5,7 एवं 8 का उत्‍खनन का कार्य प्रगति पर है।

 

6.7 मशीन हॉलः-

         

  • ईएल 580 मी. तक मशीन हॉल एवं नियंत्रण कक्ष की बेंचिग के लिए इंस्‍ट्रूमेंटेशन एवं मॉनीटरिंग सहित उत्‍खनन और सपोर्ट, सर्विस बे क्षेत्र और यूनिट क्षेत्र में निर्मित सेक्‍शन सहित क्रेन बीम के लिए डिजाइन एवं ड्राइंग्‍स पहले ही जारी कर दी गर्इ है। 
  • मशीन हॉल अपर ड्रैनेज गैलरी का उत्‍खनन का कार्य पूर्ण हो गया है (कुल 468 आरएम) ।
  • मशीन हॉल लोअर ड्रैनेज गैलरी का उत्‍खनन का कार्य पूर्ण हो गया है (कुल 533 आरएम) ।
  • मशीन हॉल के बेंचिंग का सर्विसबे लेवल तक (ईएल 582 मी.) का कार्य प्रगति पर है।

 

मशीन हॉल के नियंत्रण कक्ष और ईएल 582 मी. यूनिट-5 में ईएल 584 मी. और यूनिट-6, 7 एवं 8 के क्षेत्रों में 589 मी. वर्तमान स्‍तर है। सर्विस बे क्षेत्र में बेंचिंग के लिए उत्‍खनन का कार्य हो गया है। मशीन हॉल में कुल 2,20,000 घन मी. में से 1,14,807 घन मी. उत्‍खनन हो गया है। नियंत्रण कक्ष और सर्विस बे क्षेत्र में मशीन हॉल में वर्तमान स्‍तर ईएल 584 है जिसमें यूनिट क्षेत्र में औसत स्‍तर ईएल 589 मी. है।  

  • महीने के दौरान यूनिट-8 अपस्‍ट्रीम क्षेत्र के मशीन हॉल में क्रेनबीम की कस्‍टिंग के साथ यूनिट-8 और यूनिट-6,7 एवं क्षेत्र में क्रेन बीम की कास्‍टिंग भी पूरी हो गई है। यूनिट-8 डाउनस्‍ट्रीम क्षेत्र में क्रेन बीम के लिए सुदृढ़ीकरण एवं शटरिंग प्रगति पर है तथा जून,15 के प्रथम सप्‍ताह में घोषित करने की योजना है।
  • सर्विस बे क्षेत्र में क्रेन बीम में हॉल्‍स की ड्रिलिंग और केबल एंकर्स का संस्‍थापन प्रगति पर है।

 

6.8      डाउनस्ट्रीम सर्जशाफ्ट (3 एवं 4):-

 

·         लिंक भाग सहित डाउनस्‍ट्रीम सर्जशाफ्ट उपरी चैंबर्स के उत्‍खनन एवं सपोर्ट के लिए उत्‍खनन एवं सपोर्ट हेतु डिजाइन एवं ड्राइंग्‍स जारी कर दी गई हैं। डाउनस्ट्रीम सर्जशाफ्ट के चारों ओर उत्‍खनन भी पूरा कर लिया गया है। (168 आरएम)

·         डाउनस्ट्रीम सर्जशाफ्ट-3 एवं 4 का पाइलेट शाफ्ट उत्‍खनन भी पूरा हो गया है।

·         डाउनस्ट्रीम सर्जशाफ्ट (168 आरएम) के चारों ओर ड्रेनेज गैलरी (ईएल 596 मी.) का उत्‍खनन भी पूरा कर लिया गया है।

·         वर्तमान ड्रिफ्ट (2263.50क्‍यूमेक) को प्‍लग करने के कार्य पूर्ण हो गया है। टॉप चैंबर का उत्‍खनन शुरू किया जा रहा है।   

 

6.9       टेल रेस सुरंग (टीआरटी-3 एवं 4) :-

           

·         टीआरटी के उत्‍खनन और सपोर्ट के लिए डिजाइन एवं ड्राइंग्‍स जारी कर दी गई हैं।

·         टीआरटी-3 के पूरे मुहाने में शीर्ष उत्‍खनन 403.50 आरएम लं. में पूर्ण कर लिया गया है जबकि ड्रिफ्ट में 1070आरएम में से 57.50 आरएम लं. में उत्‍खनन पूर्ण कर लिया गया है।

·         टीआरटी-4 के पूरे मुहाने में शीर्ष उत्‍खनन 314 आरएम लं. में पूर्ण कर लिया गया है, जबकि ड्रिफ्ट में उत्‍खनन कुल 1160 आरएम में से 158.40 आरएम लं. में पूर्ण कर लिया गया है।

 

6.10     टीआरटी आउटलेट :-

·       टीआरटी आउटलेट के समीप सड़क प्रतिरक्षा कार्य के लिए डिजाइन एवं ड्राइंग्‍स जारी कर दी गई हैं। कार्य शुरू कर दिया गया है।

6.11  वेंटिलेशन सुरंगः-

·       उत्खनन एवं सपोर्ट, कंक्रीट लाइनिंग एवं संपर्क ग्राउटिंग के लिए डिजाइन एवं ड्राइंग्स जारी कर दी गई हैं। वेंटीलेशन सुरंग का उत्खनन प्रगति पर है और 581 आरएम में से 419 आरएम लंबाई में पूरा हो गया है। 

 

7.0   इलैक्ट्रो-मैकेनिकल कार्य

7.1   इलैक्ट्रो-मैकेनिकल कार्यों हेतु डिजाइन एवं ड्राइंग्स: ईएम कार्यों हेतु डिजाइन एवं ड्राइंग्‍स की स्‍थिति निम्‍नानुसार है-

 

31.05.15 के अनुसार टिहरी पीएसपी के लिए ईएम डिजाइन की स्‍थिति

 

दस्‍तावेज का

प्रकार

अवधि

(01 मई 15 -

31 मई, 15) के दौरान प्रस्‍तुत किए गए दस्‍तावेज

31 मई, 2015 तक प्रस्‍तुत किए गए कुल  दस्‍तावेज

अवधि

(01 मई 15 -

31 मई, 15) के दौरान अनुमोदित  किए गए दस्‍तावेज

31 मई, 2015  तक अनुमादित  किए गए कुल  दस्‍तावेज

अवधि

(01 मई 15 -

31 मई, 15) तक अल्‍सटॉम की ओर से प्रतीक्षित पुनरीक्षित

 कुल दस्‍तावेज

31 मई, 2015 तक अल्‍सटॉम की ओर से प्रतीक्षित पुनरीक्षित

 कुल दस्‍तावेज

एल 1

0

113

0

98

0

17

एल 2

24

335

16

210

20

105

 

अनुमोदित किए गए एल-2 डिजाइन दस्‍तावेज

1.   15.75 के वी एम वी स्‍विचगियर पैनल-एसएलडी, स्‍कीम, बीओएम, रेव सी 01.05.15 को अनुमोदित।

2.   सीसीएमएस- स्‍टेशन कॉमन ऑक्‍जीलियाराइज इनपुट/आउटपुट लिस्‍ट रेव सी 07.05.15 को अनुमोदित ।

3.   बटरफ्लाई वाल्‍व लोड्स, अपलाइड ऑन टू कंक्रीट केलकुलेशन नोट 07.05.15  को अनुमोदित ।

4.   पेनस्‍टॉक हेड वाल्‍व इरेक्‍शन टूल्‍स जीए, रेव ए 07.05.15  को अनुमोदित ।

5.   पेनस्‍टॉक हेड वाल्‍व इरेक्‍शन टूल्‍स जीए बीओएम, रेव ए 07.05.15   को अनुमोदित ।

6.   11 के.वी. एमवी स्‍विचगियर पैनल जीए ड्राइंग, रेव सी 12.05.15 को अनुमोदित ।

7.   11 के.वी. एमवी स्‍विचगियर पैनल टैक्‍नीकल स्‍पेसीफिकेशन, रेव बी 12.05.15 को अनुमोदित ।

8.   11 के.वी. एमवी स्‍विचगियर पैनल एसएलडी स्‍कीम एवं बीओएम रेव सी 12.05.15 को अनुमोदित ।

9.   पीएच कूलिंग वॉटर सिस्‍टम- प्रोसेसिंग नोटिस, रेव बी 20.05.15 को अनुमोदित ।

10. केबिल ट्रे नेटवर्क  गाइड ड्राइंग- जेनरेटर फ्लोर ईएल-578.10 रेव सी 21.05.15 को अनुमोदित।

11. केबिल ट्रे नेटवर्क  गाइड ड्राइंग- एमआईवी/ऑक्‍जीलरी फ्लोर ईएल-562.30/ईएल-566.80 रेव सी 21.05.15 को अनुमोदित।

12. कॉमन ऑक्‍जीलरी कंट्रोलर- फंकशनल एनालाइशिस रेव बी 23.05.15 को अनुमोदित ।

13. पंप टरबाइन शॉफ्ट सील असेंबली- असेंबली क्रॉस सेक्‍सन एवं टॉप व्‍यू, रेव जी 29.05.15 को अनुमोदित ।

14. पंप टरबाइन शॉफ्ट सील जनरल असेंबली- बीओएम, रेव ई 29.05.15 को अनुमोदित

15. पेनस्‍टॉक वाल्‍व- वॉल्‍व एवं सर्वोमोटर इमबेडेड पार्ट्स, रेव सी 29.05.15  को अनुमोदित

16. पेनस्‍टॉक वाल्‍व– वॉल्‍व एवं सर्वोमोटर जनरल असेम्‍बली- बीओएम-रेव सी 29.05.15 को अनुमोदित ।

 

7.2  आपूर्तियों की स्‍थिति:

ऑन शोर

Ø   यूनिट-5, 6 एवं 7 एवं 8 के लिए ड्राफ्ट ट्यूब एल्‍बो, लाइनर एवं एम्‍बेडमेंट परियोजना स्‍थल पर प्राप्‍त हो गए हैं।

Ø   यूनिट-5, 6 तथा यूनिट-7 (लॉट-1 एवं 2) एवं यूनिट-8 (लॉट-1 एवं 2) के लिए स्‍टेटर कोर लेमिनेशन प्राप्‍त हो गए हैं और ऋषिकेश में भंडारित की गई है।

Ø   स्‍टेटर फ्रेम (यूनिट #5), यूनिट#5 एवं यूनिट#6 एवं 7 की स्‍पाइरल केस, स्पाइरल केस विस्तारण पाइप(यूनिट #5), यूनिट #5 के लिए स्टेरिंग एवं स्पाइरल केसिंग एवं यूनिट#5 एवं यूनिट#6 एवं 7  की स्‍टेरिंग परियोजना स्‍थल पर प्राप्‍त हो गए हैं।

Ø   आवश्यक स्पेयर्स के साथ सर्ज अरेस्टर (3+1) परियोजना स्थल पर प्राप्त हो गए हैं।

Ø   केंद्र सर्विस ट्रांसफार्मर- डब्ल्यू/ ग्रिड वोल्टेज ब्रेक करने के लिए परियोजना स्थल पर प्राप्त हो गए हैं।

Ø   संयंत्र की अर्थिंग और ग्राउंडिंग प्रणाली –इम्‍बेडेड अर्थिंग सामग्री-लॉट-1 परियोजना स्थल पर प्राप्त हो गई है

Ø   02 ईओटी क्रेन रनवे रेल (2 लॉट) और सभी संयोजक परियोजना स्‍थल पर प्राप्‍त हो ग हैं।  

Ø   रन-वे रेल्‍स और सभी संयोजकों के साथ बटर फ्लाई वॉल्‍व चैम्‍बर के लिए 01 ईओटी क्रेन की परियोजना स्‍थल पर प्राप्‍त हो ग है।

Ø   यूनिट# 6 एवं 7 के लिए बीएफवी अपस्‍ट्रीम स्‍लीव परियोजना स्‍थल पर पहुंचे हैं परंतु 1 मद(3 मदों में से) अर्थात पार्ट नं. 201 क्‍यू. ए. से स्‍वीकृति की प्रतीक्षा है।

Ø   यूनिट# 5 के लिए बीएफवी डाउनस्‍ट्रीम स्‍लीव परियोजना स्‍थल पर प्राप्‍त हो गई हैं।

Ø   सभी 04 जीएसयू ट्रांसफामर्स प्राप्‍त हो गए हैं तथा कोटी कालौनी, टिहरी मैकेनिकल कार्यशाला में भंडारित कर दिए गए हैं।

Ø   सीवीटी-03 कार्यस्‍थल पर प्राप्‍त नहीं हुई ।

Ø   यूनिट-6 के लिए टरबाइन शॉफ्ट प्राप्‍त हुई और कार्यस्‍थल पर भंडारित की गई है।

Ø   निम्‍न कंप्रेश्‍ड एअर सिस्‍टम के निम्‍न उपकरण कार्यस्‍थल पर प्राप्‍त किए गए।

Ø   कंप्रेशर्स (एलपी)-02 लॉट्स, एयर रिसीवर टैंक-02 लॉट्स, एयर ड्रायर-02 लॉट्स, प्रेशर रेडयूसर-02 लॉट्स, इंस्‍ट्रुमेंट्स-02 लॉट्स, कंप्रश्‍ड एयर सिस्‍टम-02 लॉट्स के लिए विविध मदें।

    

ऑफ शोर

Ø   यूनिट-5 के लिए स्‍टेटर बार्स प्राप्‍त हो गई हैं ओर ऋषिकेश में भंडारित की गई हैं।

Ø   यूनिट-5 के लिए टरबाइन शॉफ्ट प्राप्‍त हो गर्इ है और परियोजना स्‍थल पर भंडारित कर दी गई है।

Ø   जीआईएस एवं जीआईबी उपस्‍कर-आठ लॉट्स में से 07 लॉट परियोजना स्‍थल पर प्राप्‍त हो गए हैं। 01 लॉट परिवहन में है

Ø   जीआईएस/जीआईबी के लिए सक्रिट ब्रेकर्स (05) का निरीक्षण हो गया है और सामग्रियां परिवहन में है।     

 

7.3  उत्‍थापन/ फैब्रीकेशन की स्‍थिति

       बीम में संयोजन को लगाने का काम 362 में से 328 आरएम की लं. में पूरा कर दिया गया हैं।  

 

8.0  हाइड्रो- मैकेनिकल कार्य

     

8.1  एचएम कार्यों के लिए डिजाइन एवं ड्राइंग्‍स :

 

चरण-1 डिजाइन दस्तावेज

 

·       पैनस्‍टॉक स्‍टील लाइनर सहित एचएम उपस्‍कर का चरण-1 डिजाइन अनुमादित हो गया है।

 

चरण-2 डिजाइन एवं ड्राइंग्स दस्तावेज

 

(क)    पैनस्‍टॉक स्‍टील लाइनर्स

(क)

·       पैनस्‍टॉक स्‍टील लाइनर्स (डाउनस्‍ट्रीम वाईफरकेशन के सिवाय) के लिए चरण-2 डिजाइन एवं ड्राइंग्‍स अनुमोदित हो गई हैं।

·       अपस्ट्रीम  बाइफरकेशन (07 नं.) का 15.03.2015 को प्राप्त पुनरीक्षित डिजाइन 15.04.2015 को अनुमोदित हो गया है।

·       पैनस्टाक स्टील लाइनर से संबंधित एफसीएडब्‍ल्‍यू वेल्‍डिंग प्रक्रिया (एएसटीएम 517 ग्रेड एफ एवं एस 460 एमएल सामग्री) के लिए पुनरीक्षित डब्ल्यूपीएस दस्तावेज 13.03.2015 को प्राप्त कर लिए गए हैं और 10.04.15 को अनुमोदित कर दिया गया है।

·       पैनस्टाक स्टील लाइनर से संबंधित पुनरीक्षित मेन हॉल ड्राइंग्‍स संघ से 13.04.15 को प्राप्‍त हुई है उसकी समीक्षा एवं मंतव्‍य 11.05.15 को भेज दी गई है।   

·       सैंड ब्‍लास्‍टिंग और पेंटिंग प्रक्रिया से संबंधित पुनरीक्षित दस्‍तावेज 17.04.15 को संघ से प्राप्‍त हो गई है और 11.05.15 को अनुमोदित कर दी गई है।

 

·       डाउनस्‍ट्रीम ट्रांजिशन से संबंधित पुनरीक्षित डिजाइन और ड्राइंग्‍स 01.05.15 को संघ से प्राप्‍त हो गए हैं उसकी समीक्षा कर मंतव्‍योंंतव्‍यों ाप्‍त हो गए हैं। हैं।      के साथ संघ को 27.05.15 को भेज दिया गया है।

·       पेनस्‍टॉक के डब्‍ल्‍यू पीएस से संबंधित दस्‍तावेजों को जल्‍दी से प्रस्‍तुत काने का अनुस्‍मारक संघ को 21.05.15 को भेजा गया है।

 

(ख)  गेट एवं उत्‍तोलक

ड्राफ्ट ट्यूब गेट के लिए पुनरीक्षित डिजाइन (02) एवं ड्राइंग्‍स (09) संघ से 16.01.2015 को प्राप्‍त हो गई हैं। इन पर अभ्‍युक्‍तियां 13.02.2015 को संघ को भेज दी गई हैं। ड्राफ्ट ट्यूब गेट से संबंधित दस्‍तावेजों को शीघ्रता से प्रस्‍तुत करने हेतु संघ को 21.05.15 को अनुस्‍मारक भेजा गया है।    

 

·       टीआरटी आउटलेट, ट्रेसरेक्‍स एवं स्‍टॉप लॉग गेट के लिए डिजाइन एवं ड्राइंग्‍स टीआरटी आउटलेट के हाइड्रोलिक मॉडल अध्‍ययन को अंतिम रूप दिए जाने के बाद संघ द्वारा प्रस्‍तुत की जाएंगी।    

 

8.2 आपूर्तियों की स्थिति

      9800 मि.. की नियोजित मात्रा में से लगभग 7213 मि.. स्टील प्लेट्स परियोजना स्थल पर प्राप्त हो गई है।

 

8.3 एचएम फेबरीकेशन/इरेक्‍शन कार्य: पेनस्‍टॉक स्‍टील लाइनरों   का फेबरीकेशन प्रगति पर है और 600 फेरल्‍स में से 91 फेरल्‍स, 2.5 मी. के प्रत्‍येक लं. में पूरे कर दिए गए हैं।

 

      रिपोर्टिंग माह मई,15 तक निष्‍पादित किए गए परियोजना कार्यों की भौतिक प्रगति यथा अनुलग्‍नक- I के रूप में संलग्‍न है।  

 

9.0  समाधान किए जाने वाले मुद्दे

         

9.1 असेना खदान लीज आगे बढ़ाना 

 

·       फरवरी'12 में खनन के लिए अनुमति के कारण डीएम टिहरी ने जुलाई'12 में असेना खनन क्षेत्र में सभी गतिविधियों को रोक दिया था। 01 अप्रैल,2013 को डीएम, टिहरी ने खनन लीज को भी खारिज कर दिया। सीसीआई पीएमजी की दिनांक 11.08.2014 एवं 07.11.2014 को आयोजित हुई क्रमशः 5वीं एवं 6वीं बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार एसईआईएए से पुनरीक्षित पर्यावरण मंजूरी 03 जनवरी,2015 को प्राप्त हो गई थी। उसके बाद डीएम टिहरी ने लीज की वैधता समाप्त होने की तिथि 13.02.2015 से ठीक पूर्व 11.02.2015 को असेना से खदान पर उत्खनन हटा लिया था।

·       लीज बढ़ाने के लिए प्रस्ताव डीएम टिहरी को 01.01.2015 को प्रस्तुत किया गया था। लीज बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन से लगातार संपर्क किया जा रहा है।

·       संयुक्त सचिव, विद्युत मंत्रालय ने उत्तराखंड सरकार से दिनांक 12 फरवरी,2015 के पत्र के माध्यम से टिहरी पीएसपी के कार्यो के लिए असेना खदान की खनन लीज जारी रखने के लिए कार्रवाई में तेजी लाने का अनुरोध किया था लेकिन उत्तराखंड सरकार द्वारा नई लीज के समान प्रकिया-विधि का अनुसरण किया जा रहा है

·       08.0515 को संपन्‍न 7वीं  सीसीआईपीएमजी बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, टीएचडीसी को अगले तीन दिनों के अंदर जिलाधिकारी को इस आश्‍वासन के साथ कि अगले 10 दिनों के अंदर मामले को जिला प्रशासन प्रक्रिया में लाया जाएगा और 31 मई'15 तक खनन लीज दे दिया जाएगा इसलिए असेना खनन के बीच के लिए अलग से आवेदन करने की सलाह दी गई थी।

·       टीएचडीसी ने 11.05.15 को जिलाधिकारी(टिहरी) को लीज विलेख के नवीकरण के लिए वांछित दस्‍तावेज प्रस्‍तुत कर दिए।

·       जिला मजिस्‍ट्रेट कार्यालय के द्वारा यह सूचित किया गया कि मामले को स्‍वीकृति के लिए राज्‍य खनन विभाग, उत्‍तराखंड सरेार को 18.05.15 को अग्रसारित किया गया है।

·       लीज वृद्धि को शीघ्रताशीघ्र करने के लिए टीएचडीसी के अधिकारियों के द्वारा राज्‍य सरकार के साथ नियमित आधार पर संपर्क किया जा रहा है। 

·       एग्रीगेट एवं क्रस्‍ड सेंड के लिए असेना में खनन गतिविधि के लिए अनुमति के अभाव में, कंक्रीटिंग की प्रगति धीमी है। इससे क्रसिंग संयंत्र के संस्‍थापन में देरी भी हो रही है।

·       एग्रीगेट एवं क्रस्‍ड सेंड की भावी आवश्यकता, जिसे खुले बाजार (ऋषिकेश/हरिद्वार) से पूरा नहीं किया जा सकता जिससे परियोजना में बहुत समय और लागत वृद्धि होगी

9.2 चोपड़ा गांव में डंपिंग क्षेत्र के लिए 05 हेक्‍टेअर भूमि परिवर्तन:

 

·         चोपडा गांव में डंपिग क्षेत्र के लिए 4.668 हेक्‍टेअर भूमि परिवर्तन का मामला लंबित है।  अगस्‍त 2013 में भूमि परिवर्तन मामला डीएफओ को सौंपा गया था। डीएफओ ने फरवरी-14 में उसे जिलाधिकारी(टिहरी) को प्रस्‍तुत किया।

·         7वीं सीसीआई पीएमजी बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार राज्‍य सरकार ने टीएचडीसी को सलाह दी कि चोपड़ा गांव में उपलब्‍ध डंपिंग जारी रखने के साथ ही अतिरिक्‍त वन क्षेत्र स्‍वीकृति वन विभाग और जिला प्रशासन का मामला सुलझा लिया जाएगा इसमें निर्णय लिया गया कि जिलाधिकारी, टिहरी, टीएचडीसी के सहयोग से उपयुक्‍त भूमि व्‍यवहार्यता और मिट्टी की मात्रा जिसे कोटी क्षेत्र में डंप किया जाना है, का पता लगाएगी।

·         चोपड़ा निस्‍तारण क्षेत्र के भूमि परिवर्तन का मामला जिलाधिकारी टिहरी के द्वारा बिना ऑनलाइन प्रक्रिया के अभी अग्रसारित किया जाना है ताकि टीएचडीसीआईएल प्रस्‍ताव ऑनलाइन के नया सिस्‍टम से पहले मामले को प्रस्‍तुत कर सके।  

 

10.0    कमीशनिंग समय सूची:

संविदाकार को नियमित रूप से कार्य प्रगति में सुधार लाने के लिए कहा जा रहा है। परियोजना को मई, 2018 तक कमीशनिंग किए जाना प्रस्‍तावित है।

 

11.0     परियोजना पर व्यय

टिहरी पीएसपी परियोजना पर मई,15 तक 1235.16 करोड़ रू. का व्यय हुआ है। इसमें 100.53 करोड़ रू. की आईडीसी एवं एफसी शामिल है।  

 

12.0     बजट प्राक्‍कलन बनाम व्यय

 

मई,15 के दौरान टिहरी पीएसपी पर 51.02 करोड़ रू. के पुनरीक्षित बजट अनुमान की तुलना में 36.33 करोड़ रू. का व्यय किया गया है।

 

विष्णुगाड पीपलकोटी एचईपी (444 मे.वा.)

 

विष्णुगाड-पीपलकोटी हाइड्रो इलैक्ट्रिक परियोजना (4 x 111 मे.वा.) एक रन ऑफ दि रिवर योजना है। इसमें अलकनंदा नदी (गंगा नदी की एक बड़ी सहायक नदी) पर 237 मी. सकल शीर्ष सहित 65 मी. ऊंचा कंक्रीट डाइवर्जन बांध का निर्माण शामिल है। परियोजना उत्तराखण्ड राज्य के चमोली जिले में स्थित है, जो ऋषिकेश से राष्ट्रीय राजमार्ग- 58 पर 225 कि.मी. की दूरी पर स्थित है।

 

1.0          परियोजना से लाभ

 

  • उत्तरी क्षेत्र में 444 मे.वा. की क्षमता वृद्धि, जो क्षेत्र में पीकिंग पावर की कमी को कम करेगा।
  • 1674 मि.यू. का वार्षिक ऊर्जा उत्पादन (90% निर्भरता वर्ष)
  • चमोली/गढ़वाल क्षेत्र में रोजगार, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, वनिस्पतियों/पादप, जीवों इत्यादि का समेकित विकास।
  • गृह राज्‍य उत्‍तराखंड को 13% मुफ्त विद्युत में से 1% स्‍थानीय क्षेत्र विकास के प्रति अंशदान हेतु उपयोग किया जाएगा।

 

2.0          परियोजना अनुमोदन

 

क्र.सं.

 

दिनांक

1

टीएचडीसी एवं उत्तराखण्ड सरकार ने अन्वेषण एवं डीपीआर तैयार करने हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे।

08.04.2003           

2

कार्यान्वयन करार पर हस्ताक्षर किए गए थे।

02.06.2006

3

केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) द्वारा परियोजना को वाणिज्यिक व्यवहार्यता प्रदान की गई।

फरवरी, 05

4

केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा परियोजना को तकनीकी-आर्थिक स्वीकृति प्रदान की गई।

सितंबर, 06

5

सीसीईए द्वारा परियोजना को 2491.58 करोड़ रूपए (मार्च-08 मूल्‍य स्‍तर) के लिए निवेश अनुमोदन ।

21.08.2008

6

"न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह " 3 क्यूमैक्स से 15.65 क्यूमैक्स तक पुनरीक्षित किया गया है।

31.05.2011

7

पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा 80.507 हेक्टेअर वन भूमि की चरण-1 के लिए अनुमति ।

03.06.2011

8

पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा 80.507 हेक्टेअर वन भूमि के अंतरण के लिए अंतिम अनुमोदन ।

28.05.2013

9

80.507 हेक्‍टेयर वन भूमि के हस्‍तांतरण के लिए उत्‍तराखंड सरकार द्वारा शासनादेश जारी कर दिया गया है

06.12.2013

10

80.507 हेक्‍टेयर वन भूमि के हस्‍तांतरण के लिए लीज करार पर हस्‍ताक्षर हो गए हैं।

05.04.2014

11

80.507 हेक्‍टेयर भूमि को सुरक्षित भूमि घोषित करना

26.08.2014

 

3.0 पुनरीक्षित लागत प्राक्कलन

अक्टूबर, 2011 के मूल्य स्तर पर 3745.08 करोड़ रूपए राशि (309.53 करोड़ रूपए की आईडीसी एवं एफसी सहित) का पुनरीक्षित लागत प्राक्कलन (आरसीई) विद्युत मंत्रालय को 28 मार्च,12 को प्रस्तुत किया गया था। इसे विद्युत मंत्रालय द्वारा जांच हेतु सीईए को अग्रसारित किया गया था। आईडीसी के संदर्भ में सीईए के प्रेक्षणों का उत्‍तर दे दिया गया है। सीईए ने दिनांक 18 सितंबर, 2012 के अपने पत्र द्वारा सूचित किया है कि प्रस्तुत की गई आरसीई को वापिस समझा जाए क्योंकि पुनरीक्षित डिजाइन ऊर्जा के अनुमोदन में समय लग सकता है। वीपीएचईपी की अद्यतन की गई फ्लो सीरिज सीडब्‍ल्‍यूसी द्वारा अनुमोदित कर दी गई है। डिजाइन ऊर्जा की गणना  ई एंड एम डिजाइन द्वारा की जा रही है और सीईए को शीघ्र ही प्रस्‍तुत की जाएगी।

 

4.0       प्रमुख कार्य

प्रमुख सिविल कार्यों में एक 65 मी. ऊंचा कंक्रीट बांध, 13.4 कि.मी. लम्बी हेड रेस सुंरग, 3.07 कि.मी. लम्बी टेल रेस सुरंग, स्पिलवे, भूमिगत पावर हाउस एवं ट्रांसफार्मर हॉल, 03 सेडीमेंटेशन चैम्बर, अपस्ट्रीम एवं डाउनस्ट्रीम सर्ज शॉफ्ट शामिल हैं। परियोजना का ले-आउट प्लान प्रदर्श-।।। में संलग्न है।

 

5.0       परियोजना वित्त पोषण

  • परियोजना का निर्माण 70:30 के ऋण इक्विटी अनुपात के साथ वित्त पोषण करने की योजना है। इक्विटी भाग को टीएचडीसी एवं भारत सरकार की 50:50 के अनुपात में हिस्सेदारी होगी। 50% में से भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार क्रमशः 75:25 के अनुपात में सहभागिता करेंगे।
  • परियोजना के ऋण हिस्से (70%) के वित्त पोषण के लिए विश्व बैंक के साथ 648 मिलियन यू.एस. डालर के ऋण के लिए 10 अगस्त, 2011 को ऋण अनुबंध पर हस्ताक्षर कर दिए गए हैं। इस ऋण में क्षमता निर्माण और संगठनात्‍मक सुदृढीकरण (सीबीआईएस) के लिए 10 मिलियन यूएस डालर शामिल हैं। ऋण 29 वर्षों की अवधि के साथ 07 नवंबर, 2011 से प्रभावी हो गया है।

 

6.0        प्रारंभिक परियोजना कार्य

अन्वेषण :

  • परियोजना के सभी स्थानों पर भू-गर्भीय अन्वेषण एवं कई आवश्यक अध्ययन पूरे कर लिए गए हैं।

विद्युत गृह की योजना चैनेज 300-446 मी. के बीच हाट गांव (डोलोमाइट जोन से बाहर) बनाई गई है। तदनुसार, क्रास ड्रिफ्ट (कुल 75 मी.) की खुदाई आर/एस पर नए स्थल चैनेज 410 मी. पर की गई है। गहन अन्वेषणों के तौर पर, ड्रिफ्ट को चैनेज 500 मी. पर 90 मी. तक आगे बढ़ाया गया है। हरसारी के ग्रामीणों द्वारा बाधा पहुंचाए जाने के कारण क्रास कट पूरा नहीं हो सका। मुद्दे को हल करने के लिए डीएम (चमोली) द्वारा हरसारी के ग्रामीणों के साथ बैठक की गई। डीएम ने हरसारी गांव की सीमा के बाहर ड्रिफ्ट/एडिट की योजना बनाने के निर्देश जारी किए थे।

 

  • तदनुसार विद्युत गृह # 4 स्थल पर विद्युत गृह को शिफ्ट करने की परियोजना समीक्षा पैनल (पीआरपी) की संस्तुतियों पर हरसारी गांव को छोड़ते हुए एक नई ड्रिफ्ट बनाई जा रही है और 415 आरएम में से 401 आरएम लंबाई में खुदाई की गई है। क्रॉस कट्स का कार्य प्रगति पर है।

 

पुनर्वास एवं पुनर्स्‍थापन :

टीएचडीसी इंडिया लि. ने विष्णुगाड पीपलकोटी हाइड्रो इलैक्ट्रिक परियोजना की पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति (आर एण्ड आर नीति) बनाई है। नीति राष्‍ट्रीय पुनर्वास एवं पुनर्स्‍थापन नीति,2007 (एनआरआरपी-2007) पर आधारित है जिसमें स्‍वैच्‍छिक समाधान और आवश्‍यकताओं और स्‍टेकहोल्‍डरों की अपेक्षाओं पर विश्‍वबैंक के दिशा-निर्देशों पर विचार करते हुए बेहतर विशेषताओं को समाविष्‍ट किया गया है। 

 

नीति सक्रिय अप्रोच और भूमि अधिग्रहण पर समुचित योजना के माध्‍यम से आर एंड आर मुद्दों का समाधान करती है। विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी (एसएलएओ) के द्वारा प्रतिपूर्ति के वितरण के अतिरिक्‍त नीति में श्रेणियों और पात्रता का ध्‍यान रखते हुए अनुदानों के प्रावधान और अन्‍य लाभों की परिकल्‍पना की गई है।

 

आर एंड आर नीति के प्रभावी कार्यान्‍वयन के लिए पुनर्वास कार्य योजना (आरएपी) बनाई गई है जिससे उचित परिक्रमण अवधि के बाद प्रभावित परिवारों में सुधार हो सके तथा वे कम से कम अपने पूर्व के जीवन स्‍तर, जीविका क्षमता और उत्‍पादन स्‍तरों को प्राप्‍त कर सकें। आर एंड आर गतिविधियों के कार्यान्‍वयन के लिए एक प्रतिष्‍ठित स्‍थानीय एनजीओ श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम(एसबीएमए) जुटा है ।

 

भूमि अधिग्रहणः

 

  • अधिग्रहण के लिए कुल 132.029 हैक्टे. निजी भूमि एवं वन भूमि की पहचान कर ली गई है। पूरी भूमि अर्थात 31.639 हेक्‍टेअर निजी भूमि एवं 100.39 हैक्‍टे. वन भूमि पहले ही अधिग्रहित कर ली गई है।

 

  • पुनर्वास कार्य योजना (आरएपी) एवं अन्‍य आर एंड आर संबंधी गतिविधियों का कार्यान्‍वयन वर्तमान में प्रगति पर है। परियोजना ने 7 गांवों की 31.639 हैक्‍टे. निजी भूमि पर कब्‍जा कर लिया है। 86 प्रतिशत भूमिधरों (टीएच) ने विशेष भूमि  अधिग्रहण अधिकारी (एसएलएओ) से भूमि की प्रतिपूर्ति प्राप्‍त कर ली है। 07 प्रभावित गांवों में से केवल एक गांव अर्थात हॉट पुनर्व्‍यवस्‍थित किया जाना है। 

 

  • हाट गांव की 20.337 हैक्टे. भूमि के अधिग्रहण के अंतर्गत 66 परियोजना प्रभावित परिवारों की सूची जिला प्राधिकारियों द्वारा सत्यापित कर दी गई है। तदनुसार,  विशेष पैकेज की प्रथम किस्त 58 परियोजना प्रभावित परिवारों को अवमुक्‍त कर दी गई है। 58 परियोजना प्रभावित परिवारों  में से 56 परियोजना प्रभावित परिवारों को द्वितीय किस्‍त अवमुक्‍त कर दी है और 56 परियोजना प्रभावित परिवारों में से 18 परियोजना प्रभावित परिवार ने, जिन्‍होंने अपना पुराना घर गिरा दिया है और 16 परियोजना प्रभावित परिवारों ने तृतीय किस्‍त प्राप्‍त कर ली है। 02 परियोजना प्रभावित परिवारों में से तृतीय किस्‍त के वितरण की प्रक्रिया प्रगति में है जबकि 55 परियोजना प्रभावित परिवारों ने अपने मकान निर्मित कर लिए हैं।

 

  • विशेष पैकेज हेतु पात्र परियोजना प्रभावित परिवारों में से शेष बचे पात्र आवेदकों के प्रथम बैच के सत्यापन की पात्रता डीएम (चमोली) द्वारा निर्मित समिति द्वारा पूर्ण कर ली गई है। समिति ने विशेष पैकेज हेतु पात्र 12(10+2) परियोजना प्रभावित परिवारों के नामों की संस्तुति की है । 10 परियोजना प्रभावित परिवारों के साथ पहले ही करार पर हस्‍ताक्षर किए जा चुके हैं और अन्‍य 02 परियोजना प्रभावित परिवारों के लिए करार प्रक्रियाधीन है। इसी बीच, 07 परियोजना प्रभावित परिवारों ने 10 लाख रू. की एक मात्र और अंतिम किस्‍त प्राप्‍त कर ली है। इसके साथ ही एक परियोजना प्रभावित परिवार ने 6 लाख रू. के रूप में एक भाग(दो किस्‍तों में) प्राप्‍त कर लिया है।  परियोजना प्रभावित परिवार मायापुर में अपने वैकल्‍पिक मकानों में पहले से ही रह रहे हैं।

 

  • इसके अतिरिक्‍त, हरसारी गांव में अपने पुराने घर गिराने के बाद 02 परियोजना प्रभावित परिवारों को 10 लाख रू. की आर एंड आर सहायता वितरित की गई है।

 

अब तक 80 परियोजना प्रभावित परिवारों में से 55 परियोजना प्रभावित परिवारों ने नए आवास में शिफ्ट कर लिया है और 27 ने अपने मकानों को गिरा दिया है।

 

सामाजिक उत्‍तदायित्‍व:

 

  • परियोजना प्रभावित व्यक्‍तियों (पीएपी) के लिए आजीविका की प्रोन्नति एवं बेहतर रोजगार अवसरों हेतु विभिन्न दक्षता उन्नयन एवं आय पुनर्स्थापन कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसी प्रकार परियोजना प्रभावित व्यक्‍तियों को डेयरी फार्मिंग, वर्मी कम्पोस्टिंग, कटिंग एवं टेलरिंग, बुनाई, मुर्गी पालन प्रबंधन, नेपियर घास उत्पादन के क्षेत्र में प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। नगदी फसलों के उत्पादन, हर्बल औषधियों हेतु तुलसी की प्रोन्नति, हॉर्टीकल्चर गतिविधियां, मधुमक्खी पालन, व्‍यवसायिक प्रशिक्षण चलाए जा रहे हैं।  हेलंग गांव की 30 महिलाओं का टेलरिंग और मशीन बुनाई प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा हो गया है। 15 अप्रैल के दौरान कुछ प्रभावित गांवों में सब्‍जी उत्‍पादन के कार्यक्रम प्रस्‍तावित हैं। सब्‍जी उत्‍पादन कार्यक्रम जैसल, ईएल डाना एवं दासवाना में आयोजित किए गए। विशेषज्ञों के माध्‍यम से सब्‍जी उगाने का प्रदर्शन और बीज अत्‍यधिक उत्‍पादन करने वाले बीज उपलब्‍ध करवाए गए।

  

  • इसके साथ ही होटल प्रबंधन, कौशलता विकास गतिविधियां आदि पर व्‍यवसायिक प्रशिक्षण भी चलाए जा रहे हैं। परियोजना प्रभावित गांवों से 06 बेरोजगार युवाओं को जीएमआर फाउंडेशन, नई दिल्‍ली से प्राथमिक इलैक्‍ट्रिशियन पाठ्यक्रम पर 03 माह का व्‍यवसायिक प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। जैसल, हेलंग, गुलाबकोटी, बटुला से एक-एक और हाट गांव के चार, कुल 8 परियोजना प्रभावित व्‍यक्‍तियों के दूसरे बैच के प्रशिणार्थी विद्यार्थियों ने सितंबर,2014 को रूद्रप्रयाग आईटीआई में 03 माह की अवधि का फीटर ट्रेड प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। परियोजना उन्‍हें संविदाकारों और अन्‍य क्षेत्रों में उपयुक्‍त कार्य अवसर उपलब्‍ध कराना सुगम बना रही है। इसके अतिरिक्‍त 6(छह) परियोजना प्रभावित युवाओं, हाट एवं जैसल प्रत्‍येक से 02 और नौरख और पाला प्रत्‍येक से 01 जीएमआर फाउंडेशन, नई दिल्‍ली से एक्‍सकेवेटर प्रचालन पर दिसंबर, 2014 में प्रशिक्षण प्राप्‍त लिया है।

 

  • प्रभावित गांवों में विभिन्न समुदाय विकास कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं, जिनमें अवसंरचना सुधार, पेयजल आपूर्ति, जनरेटरों का वितरण, स्कूल बैगों, स्वेटरों आदि का वितरण शामिल हैं।

 

·         परियोजना ने छात्रवृत्‍ति नीति शुरू की है और यह 2010 से कार्यान्‍वयन की प्रक्रिया में है। वीपीएचईपी की छात्रवृत्‍ति नीति के अनुसरण में छात्रों को क्रमश: 1.31 लाख रू.,2.49 लाख रू. एवं 3.09 लाख रू. की राशि शैक्षिक सत्रों क्रमश: 2011-12, 2012-13 एवं 2013-14 में वितरित की गई।

 

·         शैक्षिक सत्र 2014-15 के दौरान 163 छात्रों को लाभ प्राप्‍त हुआ है जिसमें 84 छात्राएं और 79 छात्र हैं। उक्‍त सहायता के लिए 3,55,900 रू. की राशि का खर्च आया है।  

 

·         उक्‍त योजना से परियोजना प्रभावित गांवों से 285 छात्राओं सहित लगभग 530 विद्यार्थी लाभान्‍वित हुए हैं और अभी तक इस योजना पर 10,44,900/- रुपए की धनराशि खर्च हो चुकी है।

 

·         यह छत्रवृत्‍ति योजना की प्रक्रिया शैक्षिक वर्ष 2015-16 के लिए शीघ्र ही घोषित की जाएगी। 

 

अन्‍य गतिविधियां:

 इंगलिश मीडियम सीनियर सैकंड्री स्‍कूल : टीएचडीसी इंडिया लि. बंध गांव क्षेत्र में इंगलिश मीडियम स्‍कूल खोलने की योजना बना रहा है। बांड विकास समिति स्‍कूल की स्‍थापना के लिए आवश्‍यक भूमि के अंतरण को सुगम बना रही है। बांड विकास मेला के दिनांक 26 दिसंबर, 2014 को समापन दिवस के अवसर पर उत्‍तराखंड के माननीय मुख्‍यमंत्री ने टीएचडीसीआईएल के द्वारा निर्माण के लिए प्रस्‍तावित इंगलिश मीडियम स्‍कूल के लिए भूमि के अंतरण पर राज्‍य सरकार के द्वारा तत्‍काल कार्रवाई करने का आश्‍वासन दिया है। बद्रीनाथ विधानसभा के माननीय एमएलए ने मार्च'15 में किए गए भ्रमण के दौरान प्रस्‍तावित स्‍थल को संबंधित अधिकारियों के साथ देखा और स्‍कूल खोलने के लिए टीएचडीसी को भूमि हस्‍तानांतरण तुरंत करने को कहा है। 

 

एचआईवी/एड्स पर जागरूकता शिविर : श्रमिकों/कामगारों के लिए बांध परियोजना स्‍थल, हेलंग में 26 नवंबर,2014 को एचआईवी/एड्स पर जागरूकता शिविर लगाया गया था। शिविर के दौरान, निर्माण गतिविधियों में लगे कामगारों को एड्स की रोकथाम के लिए आवश्‍यक सावधानी सहित एचआईवी/एड्स के तथ्‍यों एवं भ्रांतियों के बारे में अवगत कराया गया । लोगों को उत्‍तराखंड राज्‍य एड्स नियंत्रण (यूएसएसीएस) से प्राप्‍त किए गए पंपलेट, बोशर आदि भी बांटे गए।

 

बांड विकास मेला : इस मेले का आयोजन प्रत्‍येक वर्ष दिसंबर माह में बांड क्षेत्र की औद्योगिक, कृषि, सांस्‍कृतिक धरोहर की विशिष्‍टताओं को प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है। यह मेला बांड क्षेत्र के स्‍थानीय समुदाय की कला एवं संस्‍कृति को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करता है और वीपीएचईपी के परियोजना प्रभावित क्षेत्र की बड़ी जनसंख्‍या का साक्षी है। मेले में विभिन्‍न सरकारी एंजेसियों द्वारा स्‍थानीय जनता के बीच आजीविका के अवसरों की जागरूकता के लिए विभिन्‍न योजनाओं की जानकारी के लिए दी जाती है ।

 

टीएचडीसीआईएल, वीपीएचईपी भी इस मेले में एक स्‍टॉल लगाता है। हाल ही के मेले में सामाजिक, पर्यावरण एवं तकनीकी आदि, आर एंड आर नीति, आरएपी, ईआईए/ईएमपी, तकनीकी रिपोर्ट आदि पर विभिन्‍न रिपोर्ट प्रदर्शित की गई थीं। जीआरसी एवं महिला सुरक्षा पर जागरूकता अभियान भी चलाया गया और आगंतुकों को पंपलेट आदि भी वितरित किए गए। मेले के दौरान वीपीएचईपी परियोजना प्रचालन भी एनीमेशन के माध्‍यम से प्रदर्शित किया गया।

 

आधारभूत कार्य

  • अप्रोच सड़क से पुलों, कालोनी क्षेत्र, बांध स्‍थल एवं विद्युत गृह स्‍थल के सभी चार पुल पूरे हो गए हैं।
  • अधिकांश अवसंरचनात्‍मक विकास कार्य पूरे हो गए हैं।
  • बांध स्थल एवं विद्युत गृह स्थल प्रत्‍येक के लिए 05 एमवीए लोड(66/33/11केवी उपकेंद्र) के संबंध में 02.12.2009 को मैसर्स उत्‍तरांचल पावर कारपोरेशन लि.(यूपीसीएल) के साथ एमओयू पर हस्‍ताक्षर किए गए थे।

उप-केन्द्र हेतु टैरेस के विकास के बाद मिट्टी बिछाने का कार्य 26.06.2013 को पूर्ण हो गया है । जून,2013 में प्राकृतिक आपदा और 2014 के तदंतर मानसून के कारण बांध स्‍थल उपकेंद्र को जोड़ने वाली सड़क बूरी तरह क्षतिग्रस्‍त हो गई थी और बांध स्‍थल पर उपकेंद्र के कार्य में देरी हुई। अब बांध स्‍थल उपकेंद्र को जोड़ने वाली सड़क की मरम्‍मत कर दी गई है और मोटर वाहन हेतु तैयार हो गई है। बांध स्‍थल उपकेंद्र का कार्य प्रगति पर है। विद्युत गृह उपकेंद्र में उपस्‍करों का संस्‍थापन यूपीसीएल द्वारा किया जा रहा है।

 

7.0  परियोजना स्‍थिति: परियोजना दो अलग ईपीसी संविदाओं एवं एक डिजाइन समीक्षा परामर्शी पैकेज के माध्‍यम से निष्‍पादित की जा रही है।

 

 

 

1.   डिजाइन समीक्षा परामर्शी :

मैसर्स एसएमईसी इंटरनेशनल प्रा. लि., आस्‍ट्रेलिया के साथ 10 करोड़ रू. (लगभग) और 557 हजार आस्‍ट्रे. डालर (लगभग) राशि पर डिजाइन समीक्षा परामर्शी पैकेज के लिए संविदा करार पर 28 दिसंबर,2013 को हस्‍ताक्षर हो गए हैं। कार्य प्रगति पर है।

 

2.   सिविल कार्य एवं हाइड्रो-मैकेनिकल कार्य:

सिविल एवं एचएम कार्यों के लिए ईपीसी संविदा हेतु स्‍वीकृति पत्र मैसर्स एचसीसी लि. को जारी किया था और 1597 करोड़ रू.(अनुमानित) की राशि पर  17.01.14 को संविदा पर हस्‍ताक्षर किए गए हैं।

 

महीने के दौरान प्रगति निम्‍नवत है-

·         डाइवर्जन सुरंग में शीर्ष उत्‍खनन 494 मी. कुल लंबाई में पूरा किया जा चुका है। इनलेट की तरफ से बेंचिंग कार्य दो चरणों में प्रगति पर है। प्रथम चरण बेंचिंग 280 मी. की लंबाई में 6 मी. X 2मी. पूरा कर दिया गया है और दूसरे चरण के         6मी. X 2 मी. की बेंचिंग 97मी. की लंबाई में पूरी कर दी गई है। 

 

·         डिसिल्‍टिंग चैम्‍ब्‍र 1 के लिए महीने के दौरान 44 मी. की प्रगति के साथ 8 मी. व्‍यास की पाइलेट सुरंग 390 आरएम में से  209 आरएम की कुल लंबाई में उत्‍खनित हो गया है।

 

·         एडिट 1 से एचआरटी के लिए महीने के दौरान 5मी. की प्रगति के लिए 380 मी. में से 13मी. तक की लंबाई तक उत्‍खनन कर दिया गया है। 

 

·         वेंटीलेशन सुरंग (वीटी) /एडिट से विद्युत गृह शीर्ष तक महीने के दौरान 26 मी. की प्रगति के साथ 434 आरएम में से 54 आरएम की लंबाई का उत्‍खनन कार्य पूरा हो गया है।

 

·         प्रमुख प्रवेश सुरंग (एमएटी) में पोर्टल विकास कार्य के बाद महीने के दौरान 10 मी. की प्रगति के साथ 415 आरएम में से 22 आरएम भूमिगत खुदाई कार्य कर दिया गया है। 

 

·         टीबीएम प्‍लेटफार्म (300 मी.X75मी.) का विकास प्रगति पर है और 175 मी. X70 मी. क्षेत्र को विकसित/समतल किया गया है।

 

·         टीआरटी आउटलेट का कार्य स्‍थानीय लोगों के द्वारा बंद कराया गया है, मामले को स्‍थानीय प्रशासन के साथ सुलझाया जा रहा है परंतु कार्य अभी तक शुरू नहीं किया जा सका है।

 

हाट एवं हरसारी गांव के निवासियों के द्वारा विद्युत गृह क्षेत्र में किसी प्रकार की अड़चन रोकने के लिए माननीय न्‍यायालय ने दिनांक 23 दिसंबर, 2014 को 31 जनवरी, 2015 तक अस्‍थाई निषेधाज्ञा के लिए आदेश जारी किए थे जो 15.06.2015 तक आगे बढ़ा दिया गया था।

 

3.   इलैक्ट्रो-मैकेनिकल कार्य:

इलैक्‍ट्रो-मैकेनिकल कार्य मैसर्स बीएचईएल, नोएडा को अवार्ड किया गया है और 48 माह अर्थात 18.11.2014 की पूर्णता अवधि के साथ 360.36 करोड़ रू. तथा 10.20 मिलियन यू.एस. डालर के कुल संविदा मूल्‍य पर 18.11.2014 को उनके साथ संविदा पर हस्‍ताक्षर किए गए हैं। मैसर्स बीएचईएल को जनवरी, 2015 में 33.71 करोड़ रू. और 1.02 मिलियन (अनुमानित) यू.एस.डालर का जुटाव अग्रिम अवमुक्‍त कर दिया गया है।   

 

8.0     परियोजना पर व्यय:

 

वीपीएचईपी परियोजना पर मई,15 तक 27.48 करोड़ रू की आईडीसी एवं एफसी सहित 641.42 करोड़ रू. व्यय किए गए हैं।

 

9.0     कमीशनिंग कार्यसूची:

 

परियोजना की कमीशनिंग सिविल एवं हाइड्रो-मैकेनिकल पैकेज अवार्ड होने के बाद 54 माह अर्थात जुलाई, 2018 में किए जाने की योजना है।इलैक्‍ट्रो-मैकेनिकल कार्यों के लिए संविदा 48 माह अर्थात नवंबर, 2018 तक की पूर्णता अवधि के साथ नवंबर,2014 में हस्‍ताक्षर हो सका। सिविल,एचएम और ईएम कार्यों के लिए मुद्दों के समाधान तथा समग्र परियोजना निगरानी के लिए एक मास्‍टर नियंत्रण नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। 

 

10.0    बजट प्राक्‍कलन बनाम व्यय

 

        मई,2015 के दौरान वीपीएचईपी पर 95.48 करोड़ रू. बजट अनुमान की तुलना में 21.67 करोड़ रू. का व्यय हुआ है।   

 

नई परियोजनाएं

(उत्तराखण्ड राज्य)

झेलम तमक एचईपी (128 मे.वा.)

 

·         108 मे.वा. संस्‍थापित क्षमता हेतु अद्यतन की गई डीपीआर 04 दिसंबर, 2012 को सीईए को प्रस्‍तुत की गई थी। परियोजना की अद्यतन की गई डीपीआर की जांच सीईए में प्रगति पर है। डीपीआर अक्‍टूबर, 2014 तक मंजूर होने की आशा है। 

·         दिनांक 06.06.2013 को आयोजित ईएसी की 67वीं बैठक में पर्यावरण मंजूरी के लिए प्रस्‍ताव रखा गया था। बैठक का कार्यवृत्‍त पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया था। ईएसी ने एनडीबीआर और वीओएफ दोनों की जैव-विविधता पर पड़ने वाले खराब प्रभाव को समाप्‍त करने के लिए सुधारात्‍मक उपायों एवं धौलीगंगा परियोजनाओं के संचयी प्रभाव पर नंदादेवी बायोस्‍फेर रिजर्व (एनडीबीआर) एवं वैली ऑफ फ्लावर (वीओएफ) की योजनाओं के साथ विस्‍तृत नोट प्रस्‍तुत करने को कहा है ताकि ईएसी की अगली बैठक में पर्यावरण मंजूरी पर विचार करते समय इस पर विचार किया जा सके। इसी बीच, उच्‍चतम न्‍यायालय (एससी) ने अगस्‍त, 2013 में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय एवं उत्‍तराखंड सरकार को अगले आदेशों तक उत्‍तराखंड राज्‍य में किसी भी जल विद्युत परियोजना को कोई भी पर्यावरणीय/वन मंजूरी न देने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उच्‍चतम न्‍यायालय ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को निदेशित किया है कि जैसा कि डब्‍ल्‍यूआईआई की रिपोर्ट के द्वारा संज्ञान में आया है कि प्रस्‍तावित 24 परियोजनाएं (झेलम तमक इन 24 परियोजनाओं में से एक है) अलकनंदा एवं भगीरथी नदी बेसिनों की जैव-विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं, इसकी जांच की जाए।

·         पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा दिनांक 15.10.2013 के पत्र के द्वारा अलकनंदा और भागीरथी नदी बेसिनों की जैव विविधता पर जल विद्युत परियोजनाओं के प्रभावों का विस्‍तृत अध्‍ययन करने के लिए प्रो. रवि चोपड़ा की अध्‍यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया। मामले में अंतिम निर्णय आने की प्रतीक्षा है। 

·         88.29 हेक्टेअर भूमि की प्रथम चरण की वन मंजूरी के लिए भूमि मामला उत्तराखंड सरकार को 30.11.2012 को प्रस्तुत कर दिया गया है। उत्तराखंड सरकार ने आगे विचार करने हेतु अपने दिनांक 25.06.2013 के पत्र के द्वारा कुछ सूचनाएं/दस्तावेज जैसे अनुमोदित सीएटी योजना, सीडी में डिजीटल नक्शा, डीएम और प्रभावित ग्राम सभा से निर्दिष्ट प्रारूप में अनापत्ति प्रमाण-पत्र मांगे हैं। समस्‍त सूचना/दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए गए हैं। सीएटी योजना के अनुमोदन हेतु प्रमुख वन संरक्षक, उत्‍तराखंड सरकार के साथ 10 सितंबर, 2013 को बैठक हो चुकी है। कार्यवृत्‍त के बिंदुओं की समाविष्‍ट करने के बाद पुनरीक्षित सीएटी योजना डीएफओ, एनडीबीआर द्वारा प्रमुख वन संरक्षक, उत्‍तराखंड सरकार को प्रस्‍तुत की जानी है। उत्‍तराखंड सरकार ने 17 दिसंबर,2013 के पत्र द्वारा अपनी संस्‍तुतियों सहित मामला पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को अग्रसारित कर दिया है।

·         05.03.2014 को रक्षा मंत्रालय द्वारा सुरक्षा स्‍वीकृति प्रदान की गई है।

 

मलेरी झेलम एचईपी (114 मे.वा.)

 

·         65 मे.वा. की व्‍यवहार्यता रिपोर्ट सीईए द्वारा 11.02.2014 को मंजूर कर दी गई है। उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा परियोजना की मंजूरी प्राप्‍त करने के बाद डीपीआर की तैयारी हेतु कार्रवाई की जाएगी।

 

गोहाना ताल एचईपी

 

·         488.52 करोड़ रूपए की अनुमानित लागत के साथ 50 मे.वा. की संस्थापित क्षमता हेतु गोहाना ताल एचईपी की साध्यता रिपोर्ट (एफआर), योजना के अनुमोदन हेतु सचिव (ऊर्जा), उत्तराखंड सरकार को 31 जनवरी, 2013 को प्रस्तुत कर दी गई है ताकि डीपीआर तैयार करने का कार्य किया जा सके।

 

करमोली एवं जडगंगा एचईपी

 

·         केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार ये परियोजनाएं पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र में पड़ती हैं इसलिए इन परियोजनाओं पर कोई गतिविधि नहीं चलाई जा रही है।

 

उच्‍चतम न्‍यायालय के आदेश से प्रभावित परियोजनाएं

 

          टीएचडीसीआईएल की उपर्युक्‍त 05 परियोजनाएं उच्‍चतम न्‍यायालय के दिनांक 13 अगस्‍त, 2013 के आदेश के कारण प्रभावित हुई है जिसमें पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और उत्‍तराखंड सरकार को अगले आदेशों तक उत्‍तराखंड राज्‍य में किसी भी जल विद्युत परियोजना हेतु पर्यावरण मंजूरी या वन मंजूरी न देने के लिए निर्देशित किया गया है। अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा है।  

 

टीएचडीसीआईएल ने मलेरी झेलम और झेलम तमक एचईपी के मामले को रखते हुए 06.09.2014 को माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय में एक रिट याचिका दायर की है।

 

बोकांग बेलिंग एचईपी (330 मे.वा.)

टीएचडीसीआईएल द्वारा ड्रिलिंग एवं ड्रिफ्टिंग गतिविधियां चलाने के लिए सितंबर,11 में पिथौरागढ़ के डीएफओ को एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। विभिन्न स्तरों पर प्रस्तावों पर विचार करने के बाद, उत्तराखंड सरकार ने प्रस्ताव पर अपनी संस्तुतियां 17 अक्टूबर, 2012 को प्रमुख सचिव (वन एवं पर्या.), उत्तराखंड सरकार को अग्रसारित कर दी है। एसबीडब्ल्यूएल ने 16 मार्च, 2013 को आयोजित बैठक में ड्रिलिंग एवं ड्रिफ्टिंग कार्यों को करने हेतु प्रस्ताव को संस्तुति दी है। एमओएम 03.05.2013 को निर्गत किया गया था। प्रमुख सचिव, उत्तराखंड सरकार ने एनबीडब्ल्यूएल के आगे विचारार्थ और परियोजना स्थल पर ड्रिलिंग/ड्रिफ्टिंग गतिविधियों की अनुमति हेतु 21.06.2013 को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को प्रस्‍ताव अग्रसारित किया गया था। डीआईजी (वन्‍य जीव), पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार ने दिनांक 02.07.2013 को सीडब्‍ल्‍यूएलडब्‍ल्‍यू, उत्‍तराखंड सरकार से कुछ दस्‍तावेज प्रस्‍तुत करने का अनुरोध किया है जिससे कि प्रस्‍ताव पर एनबीडब्‍ल्‍यूएल द्वारा विचार किया जा सके। सभी दस्‍तावेज डीआईजी (वन्‍य जीव) को प्रस्‍तुत कर दिए गए हैं। बोकांग बेलिंग एचईपी अस्‍कट मस्‍क डीयर पार्क के सुरक्षित अभ्‍यारण्‍य से बाहर है।   एनबीडब्‍ल्‍यू द्वारा उनके 12.08.2014 को संपन्‍न बैठक में इस प्रस्‍ताव को पर विचार किया गया है। बैठक में, सीडब्‍ल्‍यूएलडब्‍ल्‍यू, उत्‍तराखंड सरकार सर्वेक्षण एवं अन्‍वेषण के प्रस्‍ताव को हटाने पर सहमत हो गई है क्‍योंकि परियोजना सुरक्षित क्षेत्र से बाहर पड़ती है।     

 

 

नई परियोजनाएं

(उत्तर प्रदेश)

ढुकुवां एचईपी (24 मे.वा.)

 

ढुकुवां एचईपी का निर्माण बेतवा नदी के आर-पार वर्तमान ढुकुवां चिनाई एवं मिट्टी पूरित बांध के तल में किया जाना परिकल्‍पित है। 8.22 मी. ऊंचा वर्तमान बांध 2972 मी. लंबा है जिसमें से 1172 मी. चिनाई/चूना कंक्रीट से निर्मित है जबकि शेष 1800 मी. लंबाई मिट्टी से बनी है। बांध का चिनाई भाग में 8 फीट ऊंचे 383 गेट लगे हैं जिनमें से 15160 क्‍यूमेक्‍स की निकासी की क्षमता है।

 

1.0 परियोजना अनुमोदन :

क्रम सं.

दिनांक

अनुमोदन का विवरण

1

02 सितंबर,2009

उत्तर प्रदेश सरकार के साथ ढुकुवां लघु जल विद्युत परियोजना (24 मे.वा.) की डीपीआर अद्यतन करने के लिए कार्यान्वयन अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे।

2

30 जून, 2010

डीपीआर उत्तर प्रदेश सरकार को प्रस्तुत की गई थी।

3

20 दिसंबर, 2010

एमएएनआईटी द्वारा तकनीकी वाणिज्‍यिक मंजूरी और सब्‍सिडी लाभ के लिए डीपीआर को मंजूरी दे दी है।

4

29 मार्च, 2011

टीएचडीसी इंडिया लि. बोर्ड ने परियोजना की डीपीआर के प्रावधानों के अनुसार अप्रैल, 2010 के मूल्य स्तर पर 12.89 करोड़ रूपए की आईडीसी सहित 195.42 करोड़ रूपए के लागत प्राक्कलन पर परियोजना की डीपीआर को अनुमोदित कर दिया है। परियोजना की लागत इक्विटी भाग 30% निगम द्वारा अपने आंतरिक संसाधनों से उपलब्ध कराया जाएगा।

5

18 अप्रैल, 2012

परियोजना कार्यों हेतु अपेक्षित 39 हेक्टेअर भूमि की प्रथम चरण की वन मंजूरी के लिए संयुक्‍त मामला राज्य सरकार को प्रस्‍तुत किया गया था।

6

23 मई, 2012

राज्य सलाहकार ग्रुप (एसएजी) ने 23.05.12 ने प्रस्ताव को पास कर दिया है।

7

27 नवंबर, 2012

39 हेक्टेयर भूमि की चरण-प्रथम की मंजूरी कुछ शर्तों को पूर्ण करने के साथ दे दी गई है।

8

17 सितंबर, 2013

केंद्रीय नोडल वन अधिकारी, लखनऊ द्वारा द्वितीय चरण के वन परिवर्तन को मंजूरी दे दी है

9

02 जून, 2014

39 हेक्‍टेअर वन भूमि के लिए राजपत्र अधिसूचना जारी हो गई थी ।

 

2.0 निष्‍पादित किए जाने वाले प्रमुख कार्य :

 

लगभग 502 मी. लंबे अप्रोच चैनल, 04 आरसीसी बैरल, इनटेक कार्य, लगभग 1402 मी. लंबे एचआरसी, फॉर बे, स्‍पिल चैनल्‍स के साथ स्‍पिलवे, सतही विद्युत गृह, 919 मी. लंबाई की टीआरसी, क्रॉस ड्रेनेज कार्य और स्‍विचयार्ड ।

 

3.0 कार्यों के अवार्ड :

 

·         सिविल पैकेज के लिए मैसर्स सीव इंफ्रासट्रक्‍चर लि. को 94.93 करोड़ रूपए में 30.10.2014 को कार्य अवार्ड किया गया है। 24 दिसंबर,14 को करार पर हस्‍ताक्षर किए गए हैं।

 

·       इलैक्‍ट्रो-मैकेनिकल पैकेज के लिए टे क्‍नो कमर्शियल बोली मूल्‍यांकन पूरा कर दिया गया है और मूल्‍य गोली खोलने का कार्य प्रगति पर है।

 

·       हाइड्रो-मैकेनिकल पैकेज के लिए पी.क्‍यू. एवं  टेक्‍नो कमर्शियल बोली मूल्‍यांकन पूरा कर दिया गया है और मूल्‍य गोली खोलने का कार्य प्रगति पर है।

 

·       ढांचागत कार्यों (फील्‍ड हॉस्‍टल सह अतिथि गृह, ।।-टाईप आवासों एवं कार्यालय भवन) के लिए 31 मार्च,2015 को लेटर ऑफ अवार्ड जारी किया गया है।

 

 

4.0  ढांचागत कार्य:

 

·         टाइप-।। आवास के लिए आधारभूत खुदाई पूरी कर दी गई है। पिलिन्‍थ कार्य भी पूरा कर दिया गया है। चिनाई का कार्य सुपर स्‍ट्रक्‍चर में प्रगति पर है।

·         फील्‍ड हॉस्‍टल/अतिथि गृह के लिए फूटिंग खुदाई पूरी कर दी गई है। पिलिन्‍थ कार्य प्रगति पर है।

·         कार्यालय भवन के लिए आधारभूत खुदाई पूरी कर दी गई है।

 

5.0 सिविल कार्य:

 

·         सिविल कार्यों के लिए मैसर्स सीव इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर लि. के द्वारा मोबिलाइजेशन प्रगति पर है।

·         विद्युत गृहों में शीर्ष मिट्टी हटाने और एचआरसी क्षेत्र में खुदाई प्रगति पर है और स्‍थानीय लोगों के द्वारा अपनी इच्‍छानुसार दरों पर कार्य करने की मांग का दबाव डाला जा रहा है। कार्य 30.05.2015 से बंद पड़ा हुआ है।

 

6.0 सिविल कार्यों के लिए निर्माण प्रारूप (ड्राइंग्‍स)

 

            अभी तक कार्यस्‍थल पर जारी किए गए निर्माण प्रारूप इस प्रकार हैं-

 

परियोजना लेआउट प्‍लान, अप्रोच चैनल की खुदाई प्रारूप, एचआरसी इन्‍टेक्स की खुदाई प्रारूप, एचआरसी ट्रांजिशन की खुदाई प्रारूप, कर्व्ड रीच सहित एचआरसी के खुदाई प्रारूप, पेनस्‍टॉक इन्‍टेक्‍स के खुदाई प्रारूप, पेनस्‍टॉक के लिए खुदाई प्रारूप, विद्युत गृह के लिए खुदाई प्रारूप, फोस्‍बे के लिए खुदाई प्रारूप, टेलपूल के लिए खुदाई प्रारूप, टीआरसी के लिए खुदाई प्रारूप, स्‍पिल चैनल के लिए खुदाई प्रारूप, स्‍पिल चैनल(इन्‍टेक) एवं प्‍लंज पूल के लिए खुदाई प्रारूप तथा कप्‍पानाला पर एक्‍वेडक्‍ट खुदाई एवं कंक्रीटिंग के लिए खुदाई प्रारूप।  

 

7.0 परियोजना पर व्यय   

निगम द्वारा ढुकुवां एचईपी पर मई,2015  तक 25.99 करोड़ रूपए व्यय किए गए हैं।

 

8.0 बजट प्राक्कलन बनाम व्यय

मई,2015 के दौरान, ढुकुवां एचईपी पर 4.89 करोड़ रूपए के बजट अनुमान प्रावधान की तुलना में 0.40 करोड़ रूपए का व्यय हुआ है।  

 

 

 

नई परियोजनाएं

(उत्तर प्रदेश)

खुर्जा एसटीपीपी-(2x660) मे.वा.

 

·         उत्तर प्रदेश राज्य के खुर्जा में कोयला आधारित 1320 मे.वा. के सुपर थर्मल पावर स्टेशन की स्थापना के लिए 31 दिसंबर,10 को ऊर्जा विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के साथ एक समझौता करार किया गया। संयंत्र की पूर्ण क्षमता के उपयोग हेतु विद्युत क्रय करारों पर हस्‍ताक्षर हो गए हैं।

·         टीएचडीसीआईएल बोर्ड ने पीएफआर/एफआर/डीपीआर की तैयारी तथा खुर्जा एसटीटीपी की आवश्यक मूलभूत सुविधाओं के लिए आंतरिक संसाधनों से 20 करोड़ रूपए तक व्यय का अनुमोदन किया है।

·         परामर्शदाता मैसर्स एनटीपीसी द्वारा परियोजना की साध्‍यता पूर्व रिपोर्ट जुलाई, 2011 में तैयार की गई थी। परियोजना का लेआउट और डीपीआर एनएच-91 के पुन: रूट बदलने के कारण भविष्‍य में 660 मेगावाट क्षमता की तीसरी यूनिट के प्रावधान के साथ 2X660 मेगावाट परियोजना के कार्यान्‍वयन के लिए पुनरीक्षित कर दिया है।

·         29 अक्‍टूबर,2013 को एनएचएआई ने एनएच-91 के पुनर्बदलाव की सैद्धान्‍तिक सहमति से अवगत कराया है। हाइवे के रास्‍ते में बदलाव के कारण लागत, भूमि की लागत इत्‍यादि टीएचडीसी द्वारा परियोजना निधि से खर्च करना होगा। 

·         टीओआर की वैधता पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा 26.10.2015 तक बढ़ा दी गई है। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने 660 मे.वा. की 03 यूनिटों के भावी विस्‍तार के साथ 1200 एकड भूमि के पूर्ण प्‍लॉट के उपयोग, परियोजना के ले-आउट में संशोधन भी किए हैं।   

·         भारतीय विमानपत्‍तन प्राधिकरण से उनके दिनांक 18.07.2011 के पत्र के माध्‍यम से खुर्जा एसटीपीपी हेतु 275 मी. ऊंची चिमनी के निर्माण के लिए मंजूरी प्राप्‍त कर ली गई है।

·         संयंत्र की जल आवश्‍यकता पूरी करने के लिए जल के पर्याप्‍त श्रोत के रूप में ऊपरी गंग नहर की पहचान कर ली गई है। ऊपरी गंग नहर से 53 क्‍यूसेक जल उपलब्‍ध कराने हेतु दिनांक 12.06.2014 को जल संसाधन विभाग, उ.प्र. सरकार ने औपचारिक जल प्रतिबद्धता पत्र जारी कर दिया है।  

·         कोयला परिवहन एवं रेलवे साइडिंग अध्‍ययन मैसर्स आरआईटीईएस (रिट्स) के माध्‍यम से कराए गए हैं। खुर्जा एसटीपीपी के लिए रेलवे साइडिंग की अंतिम साध्‍यता रिपोर्ट उत्‍तरी क्षेत्र केंद्रीय रेलवे द्वारा अपने पत्र 11 मार्च'15 के द्वारा सैद्धांतिक अनुमोदन कर दिया है।

·         1,360 एकड़ कुल अपेक्षित भूमि में से उ.प्र. के बुलंदशहर जिले में खुर्जा तहसील के चार गांवों में लगभग 1,200.843 एकड़ भूमि उ.प्र. सरकार ने यूपीएसआईडीसी के माध्‍यम से गैर कृषि प्रयोग हेतु अधिग्रहीत कर ली है और अपने नाम पर दाखिल करा ली है।

·         पहले से ही अधिग्रहीत 1200.843 एकड भूमि का कब्‍जा टीएचडीसीआईएल को हस्‍तांतरित करने हेतु 14 दिसंबर,2013 को उत्‍तर प्रदेश औद्योगिक विकास कारपोरेशन (यूपीएसआईडीसी) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए गए।

·         टीएचडीसी इंडिया लि. द्वारा यूपीएसआईडीसी को 1200.843 एकड़ भूमि के प्रति किया जाने वाला भुगतान ओवरहेड प्रभारों सहित रू. 387.18 करोड़ है।

·         भूमि अधिग्रहण, राष्‍ट्रीय राजमार्ग -91 का मार्ग बदलने, ईआईए अध्‍ययन करने, गांवों की सड़कों को डाइवर्ट करने, भूमि के सुरक्षित कब्‍जे के लिए 585.82 करोड़ रू. की पूर्व निवेश गतिविधियां व्‍यय करने के लिए पीआईबी की संस्‍तुति मांगने के लिए पीआईबी नोट के लिए सामग्री जो अनुमोदन की प्रक्रिया में है, विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार को दिनांक 10 अक्‍टूबर, 2014 को प्रस्‍तुत कर दी है। निवेश पूर्व गतिविधियों के लिए 585.82 करोड़ रूपए का खर्चा करने के लिए पीआईबी की संस्‍तुति प्राप्‍त करने के लिए पीआईबी नोट विद्युत मंत्रालय को भेज दी गई है जो अनुमोदन की प्रक्रिया में है।

·         मई'11 में कोयला मंत्रालय को दीर्घावधि कोल लिंकेज प्राप्‍त करने के लिए निर्धारित शुल्‍क के साथ आवेदन प्रस्‍तुत कर दिया गया था।

·         खुर्जा एसटीपीपी के लिए कोल लिंकेज उपलब्‍ध कराने के लिए कोयला मंत्रालय ने 08 अप्रैल,2015 को अनुरोध पत्र दिया है।  

·         टीएचडीसीआईएल ने 27 फरवरी'15 को कोल ब्‍लॉक्‍स (1. महानदी, मचछकता, 2. चेंडीपादा, चेंडीपादा-2 और 3. मारा 2, महान) के लिए तीन आवेदन दाखिल किए हैं। टीएचडीसी इंडिया लि. ने अपने पत्र दिनांक 17 फरवरी,2015 और 19 फरवरी, 2015 को क्रमश: अपर सचिव और सचिव, भारत सरकार, कोयला मंत्रालय को संबोधित पत्र के माध्‍यम से टीएचडीसीआईएल को कोल ब्‍लॉक के आबंटन के लिए सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का अनुरोध किया है।

·         विद्युत मंत्रालय ने अपने पत्र दि. 03 मार्च'15 के द्वारा टीएचडीसी को कोल ब्‍लॉक आबंटन के लिए आवश्‍यक विचारार्थ अनुरोध किया है। विद्युत मंत्रालय ने अपने कार्यालय ज्ञापन दि. 11 मार्च'15 के द्वारा कोयला मंत्रालय को टीएचडीसी इंडिया लि. के अनुरोध पर परियोजना के लिए एक उपयुक्‍त कोल ब्‍लॉक आबंटन करने हेतु अनुरोध किया है। 

·         यूपीएसआईडीसी, जिला प्रशासन प्राधिकारियों और प्रभावित किसानों से संपर्क करने तथा भूमि का मूल कब्‍जा लेने एवं परियोजना स्‍थल कार्यालय स्‍थापित करने के लिए खुर्जा में एक कार्यालय सह ट्रांजिट कैम्‍प स्‍थापित किया जा चुका है।

·         खुर्जा एसटीपीपी के लिए निर्माण पूर्व गतिविधियों पर निवेश के लिए पीआईबी मेमो भारत सरकार के अनुमोदन के लिए विद्युत मंत्रालय द्वारा 09 मई'15 को वितरित किया गया है।

·         जन सुनवाई के लिए यू.पी. राज्‍य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को रिवाईज ईआईए/ईएमपी रिपोर्ट 19 मई'15 को प्रस्‍तुत की गई है।  

 

नई परियोजनाएं

(महाराष्ट्र राज्य)

 

मलशेज घाट पीएसएस (600 मे.वा.) एवं हुम्बर्ली पीएसएस (400 मे.वा.)

 

  • महाराष्‍ट्र में जल विद्युत का विकास करने के लिए महाराष्‍ट्र सरकार ने अप्रैल,08 में टीएचडीसीआईएल एवं एनपीसीआईएल के संयुक्‍त उपक्रम (जेवी) को मलशेज घाट पीएसएस (600 मे.वा.) एवं हुम्बर्ली पीएसएस (400 मे.वा.) सर्वेक्षण एवं अन्‍वेषण तथा परियोजनाओं की व्‍यवहार्यता सुनिश्‍चित करने के लिए डीपीआर की तैयारी तथा व्‍यवहार्य पाए जाने पर तदनंतर कार्यान्‍वयन के लिए आबंटित की हैं।

 

क.                मलशेज घाट पीएसएस

 

  • टीएचडीसीआईएल ने 700 मे.वा. की बढाई गई संस्थापित क्षमता के साथ मलशेज घाट पीएसएस की डीपीआर सचिव (सीएडी), महाराष्ट्र सरकार को 16 सितंबर, 2010 को प्रस्तुत कर दी गई है जिसमें परियोजना के कार्यान्वयन के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर करने का अनुरोध भी किया गया है।
  • महाराष्ट्र के माननीय उप-मुख्यमंत्री 29 अप्रैल, 2011 को आयोजित बैठक में मलशेज घाट पीएसएस (700 मे.वा.) के कार्यान्वयन हेतु राज्य केबिनेट के अनुमोदन के अध्यधीन टीएचडीसी इंडिया लि. और एनपीसीआईएल के संयुक्‍त उपक्रम के द्वारा कराने पर सहमत हो गए। कार्यान्‍वयन करार (आईए) के प्रारूप पर 5 नवंबर, 2011 को वार्ताएं हुई थी और संयुक्‍त सचिव (जल संसा. वि.) को ड्राफ्ट आईए पर टिप्‍पणियां 18 नवंबर, 2011 को प्रस्‍तुत कर दी गई थी।
  • माननीय विद्युत मंत्री, भारत सरकार ने दिनांक 17 सितंबर, 2012 एवं 21 मार्च, 2013 के पत्र के द्वारा महाराष्ट्र के माननीय मुख्यमंत्री से कार्यान्वयन करार पर हस्ताक्षर करने हेतु अनुमोदन प्रदान करने पर विचार करने का अनुरोध किया है। महाराष्ट्र के माननीय मुख्यमंत्री ने दि. 04 अप्रैल, 2013 के पत्र द्वारा संबंधित अधिकारियों के साथ मामले पर वार्ता करने की इच्‍छा जाहिर की है।
  • अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, टीएचडीसीआईएल ने महाराष्ट्र के माननीय मुख्यमंत्री से दिनांक 03 मई, 2013 के पत्र द्वारा मिलने का अनुरोध किया है। मुख्‍यमंत्री के कार्यालय से शीघ्र बैठक के लिए मिलने का समय प्राप्‍त करने हेतु नियमित रूप से संपर्क किया जा रहा है। आगे, टीएचडीसीआईएल के निदेशक (तकनीकी) ने 28 सितंबर, 2013 के पत्र के माध्‍यम से प्रमुख सचिव, महाराष्‍ट्र सरकार, मुख्‍यमंत्री के अपर प्रमुख सचिव एवं प्रमुख सचिव (सीएडी), महाराष्‍ट्र सरकार से मलशेज घाट पीएसएस हेतु कार्यान्‍वयन करार पर हस्‍ताक्षर के संबंध में मुख्‍यमंत्री, महाराष्‍ट्र सरकार के साथ बैठक निर्धारित करने हेतु अनुरोध किया है।
  • इसके अतिरिक्‍त सचिव (विद्युत), भारत सरकार ने प्रमुख सचिव (महाराष्‍ट्र सरकार) से दिनांक 24.07.2013 के डीओ पत्र के माध्‍यम से  बैठक करने का अनुरोध किया था और पुन: माननीय विद्युत मंत्री, भारत सरकार ने दिनांक 13.01.2014 के पत्र के माध्‍यम से मुख्‍य मंत्री, महाराष्‍ट्र सरकार से आई ए पर हस्‍ताक्षर करना सुगम बनाने के लिए मामले पर व्‍यक्‍तिगत हस्‍तक्षेप करने का अनुरोध किया है ताकि विभिन्‍न मुद्दों पर वार्ताएं हो सके तथा शीघ्र अंतिम रूप दिया जा सके।
  • माननीय मुख्‍यमंत्री महाराष्‍ट्र सरकार ने इसके प्रति उत्‍तर में दिनांक 24 जनवरी,2014 को लिखा है कि मामले की जांच प्रमुख सचिव (जल संसाधन), महाराष्‍ट्र सरकार के द्वारा की जा रही है और शीघ्र ही विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार को वापिस भेजी जाएगी। कथित मामले का अवलोकन डब्‍ल्‍यू आर विभाग, पुणे कार्यालय और मुख्‍य मंत्री कार्यालय, महाराष्‍ट्र सरकार द्वारा किया जा रहा है । तद्नुसार, टीएचडीसीआईएल और एनपीसीआईएल के अधिकारियों ने मई,2014 में प्रमुख सचिव (सीएडी), महाराष्‍ट्र के साथ एक बैठक की है।
  • महाराष्‍ट्र सरकार के साथ बातचीत के क्रम में निदशेक (तकनीकी), टीएचडीसीआईएल ने दिनांक 05 जून, 2014 के पत्र के माध्‍यम से प्रमुख सचिव, महाराष्‍ट्र सरकार से मलशेज घाट पीएसएस के लिए कार्यान्‍वयन करार पर हस्‍ताक्षर के लिए शीघ्र निर्णय लेने का अनुरोध किया है। सुयक्‍त सचिव/सीई, डब्‍ल्‍यूआरडी, महाराष्‍ट्र सरकार के साथ अपर महाप्रबंधक, पूणे द्वारा 08.10.2014 को बैठक की गई।
  • महाराष्‍ट्र सरकार के आमंत्रण पर 27.04.2015 को एक बैठक सचिव(डब्‍ल्‍यूआरएम एंड सीएडी) की अध्‍यक्षता में टीएचडीसी इंडिया लि. और एनपीसीआईएल के प्रतिनिधियों के साथ मलशेज घाट पीएसएस के लिए मसौदा कार्यान्‍वयन की शर्तें एवं निबंधन पर चर्चा हुई थी जिसमें संयुक्‍त सचिव(सीएडी) मुख्‍य अभियंता(जल विद्युत परियोजना) और एमएसईडीसीएल के प्रतिनिधि भी उपस्‍थित थे। बैठक के दौरान सचिव(सीएडी) ने सूचित किया कि महाराष्‍ट्र राज्‍य सरकार भी मलशेज घाट पीएसएस के कार्यान्‍वयन के लिए संयुक्‍त उपक्रम में लगभग 26% से 30% तक राज्‍य शेयर के साथ लगाने के भी इच्‍छुक हैं। सचिव (सीएडी) ने इच्‍छा जाहिर की कि समझौता ज्ञापन/शेयर होल्‍डर करार संयुक्‍त उपक्रम भागीदारों के कार्यों और उत्‍तरदायित्‍वों का पता लगाने को संयुक्‍त उपक्रम का गठन होने तक है। संयुक्‍त उपक्रम भागीदारों के बीच तय होना है। सचिव(सीएडी) ने टीएचडीसी इंडिया लि. से राज्‍य सरकार टीएचडीसी एवं एनपीसीआईएल के संयुक्‍त उपक्रम के द्वारा परियोजना के कार्यान्‍वयन के लिए शामिल समस्‍याओं और कदमों के संबंध में एक रोड मैप देने को कहा है। उन्‍होंने भी सूचित किया कि वे इस मामले में मुख्‍य सचिव की सराहना करते हैं और राज्‍य सरकार के एक पार्टनर होने के साथ जेवीसी के निर्माण के लिए राज्‍य केबिनेट के निर्णय के लिए मामले को आगे बढ़ाएंगे।
  • टीएचडीसी ने संयुक्‍त कंपनी (महाराष्‍ट्र राज्‍य सरकार की भागीदारी से) के द्वारा मलशेज घाट पीएसएस के कार्यान्‍वयन के लिए शामिल कदमों पर रोडमैप डब्‍ल्‍यू आर डी मंत्रालय, महाराष्‍ट्र सरकार को उनके विचारार्थ 15.05.2015 को प्रस्‍तुत कर दिया है।  
  • ईआईए अध्ययन पूर्ण हो गए हैं और ईआईए/एएमपी का ड्राफ्ट तैयार हो गया है। टीओआर की वैधता 23.10.2012 को समाप्त हो गई है और महाराष्ट्र सरकार के साथ कार्यान्वयन करार के बाद टीओआर का नया अनुमोदन प्राप्त करना होगा।      

 

ख.      हुम्बर्ली पीएसएस

·         हुम्‍बर्ली पीएसएस, कोयना वन्य जीव अभ्यारण्य (केडब्ल्यूएस) से सटे क्षेत्र में स्थित है जिससे छः गांव नामतः टोर्न, गोकुल, हुम्बर्ली, कामेरगांव, मीरगांव, देशमुखवाडी प्रभावित हो रहे हैं। केडब्ल्यूएस से अपेक्षित कुल भूमि 70.80 हेक्टेअर है, जिसमें से 47.623 हेक्टेअर ग्रामीणों की निजी भूमि है जो केडब्ल्यूएस के अंदर पड़ रही है।

  • मई, 2010 में 9.71 हेक्‍टेयर भूमि, जिसमें 4.12 हेक्‍टेयर आरक्षित वन भूमि और 5.59 हेक्‍टेयर निजी भूमि (केडब्‍ल्‍यूएलएस के अंतर्गत पड़ने वाली) शामिल है, में एस एंड आई कार्यों को करने के लिए  पुनरीक्षित प्रस्‍ताव वन संरक्षक (अधिशासी अभियंता, कोयना बांध अनुरक्षण प्रभाग के माध्‍यम से) को प्रस्‍तुत किया गया था।
  • राज्‍य वन्‍य जीव बोर्ड (एसबीडब्‍ल्‍यूएल) द्वारा दिनांक 28 जून, 2011 को मुंबई में आयोजित हुई अपनी बैठक में प्रस्‍ताव पर दी गई संस्‍तुतियों पर एनबीडब्‍ल्‍यूएल की स्‍थाई समिति ने 12-13 अगस्‍त, 2014 को आयोजित अपनी 31वीं बैठक में वन्‍य जीव विभाग के साथ परामर्श से हुम्‍बर्ली पंप स्‍टोरेज परियोजना(2X200मे.वा.) के सर्वेक्षण एवं अन्‍वेषण के लिए प्रस्‍ताव को मंजूरी दी है।  
  • ईआईए/ईएमपी अध्ययनों हेतु टीओआर का अनुमोदन 31.08.2009 को प्राप्त किया गया था। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के दिनांक 22.03.2010 के ओएम सं.-जे-11013/41/2006-आईए.।।() के अनुसार टीओआर की वैधता 30.08.2013 (टीओआर के अनुमोदन के 04 वर्ष बाद) समाप्त हो गई है।
  • 27.04.2015 को सचिव(सीएडी), महाराष्‍ट्र सरकार के साथ टीएचडीसी इंडिया लि. और एनपीसीआईएल के साथ हुई बैठक के दौरान हुम्‍बर्ली पीएसएस के विकास के लिए आगे कार्रवाई प्रक्रिया का मामले की भी चर्चा की गई थी। बैठक के दौरान महाराष्‍ट्र सरकार को बताया गया था कि हुम्‍बर्ली पीएसएस की कामचलाऊ कनवर्जन लागत, कामचलाऊ अद्यतन लागत रू. 8 से रू. 9 प्रतियूनिट की दर से आ रही है। आगे, उन्‍हें यह भी बताया गया कि संयुक्‍त उपक्रम के लिए एस एंड आई/डीपीआर पर खर्चा करने के लिए महाराष्‍ट्र सरकार की ओर से परियोजना की संयुक्‍त उपक्रम का आबंटन, आईए पर हस्‍ताक्षर करने और परियोजना से पूरी बिजली के लिए पीपीए पर हस्‍ताक्षर पक्‍का होने पर ही संभव हो पाएगा। जबकि एक डेस्‍क अध्‍ययन परियोजना समीक्षा कर ली जाए जो विशेषकर कनवर्जन हानियों राज्‍य डीपीआर के अनुसार जो 30% है, के संबंध में लेआउट और ढांचे का आकार तथा अपर जलाशय इत्‍यादि की क्षमता वृद्धि का पता लगाने के लिए हो।

 

नई परियोजनाएं

(भूटान)

 

जल विद्युत विकास में भारत-भूटान सहयोग के अंतर्गत निम्नलिखित दो परियोजनाओं के डीपीआर अद्यतन का कार्य टीएचडीसी को सौंपा गया है:

) संकोश एचईपी (4060 मे.वा.)

) बुनाखा एचईपी (180 मे.वा.)

 

संकोश एचईपी (4060 मे.वा.)

  • टीएचडीसी ने रॉकफिल मुख्य बांध विकल्प पर विचार करते हुए संकोश एचईपी की अद्यतन की गई डीपीआर विद्युत मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, सीईए और सीडब्ल्यूसी को अप्रैल, 2009 में पहले ही प्रस्तुत कर दी है।
  • सीडब्ल्यूसी ने सुझाव दिया था कि गाद के बेहतर प्रबंधन एवं बांध की दीर्घायु के लिए कंक्रीट बांध की संभावनाओं की खोज करनी होगी। भूटान की शाही सरकार ने गाद पर अध्ययन कराने का अनुरोध किया है।
  • विद्युत मंत्रालय ने संकोश की डीपीआर को अद्यतन करने के लिए 15.25 करोड़ रूपए लागत प्राक्कलन को मंजूरी दी है। भूटान की शाही सरकार तथा टीएचडीसी के मध्य 23 मार्च, 2010 को नई दिल्ली में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
  • कंक्रीट बांध विकल्प के साथ संकोश एचईपी (4060 मे.वा.) की डीपीआर तैयार की गई थी एवं दि. 31.05.2011 को सीईए, सीडब्ल्यूसी को प्रस्तुत की गई।
  • संकोश एचईपी पर 7.29 रू. (स्तरीय) के उच्च प्रशुल्क को देखते हुए, भारत सरकार एवं भूटान की शाही सरकार ने निर्णय लिया है कि बांध की ईष्टतम ऊंचाई के द्वारा संकोश की व्यवहार्यता में और सुधार किया जा सकता है।
  • टीएचडीसीआईएल के द्वारा बांध की ऊंचाई के वैकल्पिक विकल्पों के साथ ईष्टतम अध्ययन किए गए थे। और फरवरी, 2012 में शक्‍ति प्रदत्त संयुक्‍त ग्रुप (ईएजी) को प्रस्तुत किए गए थे। ईएजी द्वारा डीपीआर तैयार करने के लिए आगे बढ़ने के लिए कहा गया था। संकोश की क्षमता 5900 मि.यू. की डिजाइन ऊर्जा के साथ 2560 मे.वा. तक नीचे करने से रोलर कंक्रीट बांध विकल्प (मुफ्त विद्युत के बिना, कार्प टैक्स के बिना) के साथ औसत प्रशुल्क 3.30 रू. (स्तरीय) तक आ गया है।   
  • ईष्टतम संकोश परियोजना (2560 मे.वा.) की डीपीआर तैयार करने का कार्य भी पूर्ण हो गया है और डीपीआर 27 अगस्त, 2012 को सीईए और सीडब्ल्यूसी को प्रस्तुत कर दी गई है।

 

संकोश मुख्य बांध परियोजनाः

संस्थापित क्षमता                             2500 मे.वा.

वार्षिक ऊर्जा                                 5949.05 जीडब्ल्यूएच(डिजाइन ऊर्जा)

 

संकोश विनियमित बांध परियोजनाः

संस्थापित क्षमता                             85 मे.वा.

वार्षिक ऊर्जा                                 416.34 जीडब्ल्यूएच (डिजाइन ऊर्जा)

 

  • ईजेजी सचिवालय ने दिनांक 30 अप्रैल, 2014 के पत्र के माध्‍यम से पुष्‍टि की है कि 12 मार्च, 2014 को थिम्‍पु में ईजेजी की 12वीं बैठक में संकोश एचईपी की डीपीआर की अतिरिक्‍त लागत बिना सेवा कर के 70.022 मिलियन रू. अनुमोदित कर दी है। इसके साथ ही 152.50 मिलियन की करार लागत बिना सेवा कर के 222.522 मिलियन पुनरीक्षित हो जाएगी।
  • भूटान की शाही सरकार से डीपीआर के अध्‍यतन के लिए अनुमोदित अतिरिक्‍त लागत के प्रति 59.5187 लाख रू. राशि के लिए इन्‍वाइस भुगतान हेतु  भेजे हैं। भूटान की शाही सरकार ने 9.52 लाख रू. का अंश भुगतान अवमुक्‍त किया है।
  • 18 सितंबर, 14 को नई दिल्‍ली में 13वीं ईजेजी की संपन्‍न बैठक के दौरान यह बार सामने आई थी कि रॉयल सरकार भूटान चाहती है कि परियोजना का कार्य जल्‍दी हो, विदेश सचिव, भारत सरकार ने भूटान में जल विद्युत परियोजनाओं की प्रतिबद्धता जाहिर की लेकिन इस परियोजना के लिए समय तय करने में जैसे कि अभी कठिन है, ढांचागत विकास कार्यों के लिए किसी तरह से धन आबंटन करना अभी संभव नहीं होगा।
  • जल विद्युत परियोजना की डीपीआर की स्‍थिति की समीक्षा के लिए अध्‍यक्ष, सीडब्‍ल्‍यूसी और सदस्‍य (हाइड्रो) की अध्‍यक्षता में 29.10.2014 को एक बैठक हुई थी। हालांकि, बैठक के कार्यवृत्‍त की प्रतीक्षा है।

 

 

  • सी एंड जे कार्यों की मात्राएं उनकी जांच के लिए 20.11.14 को सीईए को प्रस्‍तुत कर दी गई हैं। संकोश एचईपी 2585 मे.वा. के सीएंडजे कार्यों की मात्रा पर अनुमोदन 05 फरवरी, 2015 को सीईए के ताप सिविल डिजाइन (टीसीडी प्रभाग) द्वारा मंजूर कर लिया गया है। संकोश एचईपी 2585 मे.वा. के निर्माण प्रक्रिया-विधि पर अभ्‍युक्‍तियों पर उत्‍तर 27 फरवरी, 2015 को सीईए/सीडब्‍ल्‍यूसी को भेज दिया गया है।
  • 26.03.2015 को सीईए में डीपीआर की जांच के लिए बैठक हुई। उनकी नई दिशा-निर्देशों के अनुसार एनसीएसडीपी(भूकंपीय डिजाइन पैरामीटर्स पर राष्‍ट्रीय समिति) की आवश्‍यकताओं का समाधान करने की आवश्‍यकता है।    

 

बुनाखा एचईपी (180 मे.वा.):

 

  • नई दिल्ली में 22 मार्च, 2010 को आयोजित ईजेजी की बैठक में बुनाखा एचईपी के डीपीआर तैयार करने की मंजूरी मिलने के बाद डीपीआर तैयार करने का कार्य शुरू हो गया था।
  • बुनाखा एचईपी (180 मे.वा.) की डीपीआर पूर्ण हो गई है एवं 30 अगस्त, 2011 को सीईए और सीडब्ल्यूसी को प्रस्तुत कर दी गई है।
  • डीपीआर सीईए द्वारा तकनीकी-आर्थिक रूप से सहमति हो गई है तथा सीईए द्वारा औपचारिक टीईसी पत्राचार जारी कर दिया गया है।
  • सीईए/सीडब्‍ल्‍यूसी/जीएसआई के सभी सुझावों को समाविष्‍ट करते हुए अंतिम डीपीआर 21 नवंबर, 2013 को भूटान की शाही सरकार को प्रस्‍तुत की जा चुकी है।
  • बुनाखा एचई परियोजना संयुक्‍त उपक्रम तरीके से निष्पादित की जानी है। सभी स्‍टेकहोल्‍डरों ने बुनाखा हेतु अंतिम रूप दिए गए लागत अंशभागिता तंत्र पर हस्‍ताक्षर कर दिए हैं। दोनों सरकारों में विभिन्‍न स्‍तरों पर संयुक्‍त उपक्रम करार पर अभी वार्ताएं चल रही हैं। विद्युत मंत्रालय ने बुनाखा एचईपी पर केबिनेट नोट के ड्राफ्ट की इच्‍छा जताई थी जो टीएचडीसी द्वारा 30.10.2013 को प्रस्‍तुत कर दिया गया था। इसे विद्युत मंत्रालय द्वारा अग्रिम कार्रवाई हेतु एमईए को अ्ग्रसारित किया गया है।
  • वर्किंग ग्रुप के निर्णय के अनुसार, निर्माण पूर्व कार्य के लिए प्राक्‍कलनों/टेंडर दस्‍तावेज तैयार करने का कार्य परियोजना के द्वारा किया जा रहा है जिसके कि जैसे ही दोनों सरकारों से मंजूरियां प्राप्‍त होती है, इन कार्यों को किया जा सके। निर्माण पूर्व गतिविधियों हेतु प्राकल्‍लन एवं निविदा दस्‍तावेज तैयार किया जाना प्रगति पर है। 
  • बुनाखा एचईपी हेतु एसआईए अध्‍ययन का कार्य राष्‍ट्रीय सांख्‍यिकी ब्‍यूरो (एनएसबी), भूटान को पहले ही अवार्ड किया जा चुका है। एसआईए अध्‍ययन की अंतिम रिपोर्ट 19 दिसंबर,2013 को एनएसबी से प्राप्‍त हो गई है और इसे डीएचपीएस, भूटान की शाही सरकार को 20 दिसंबर,2013 को प्रस्‍तुत कर दिया गया है।
  • भूटान की शाही सरकार को प्रस्‍तुत की गई अंतिम डीपीआर 18.02.14 को भूटान की शाही सरकार की केबिनेट द्वारा अनुमोदित हो गई है।
  • 12वीं ईजेजी बैठक 12.03.14 को थिम्‍पु में हुई थी। बैठक में संयुक्‍त उपक्रम करार के निम्‍न मुद्दों वार्ता हुई –

Ø  संयुक्‍त उपक्रम परियोजनाओं के निष्‍पादन के लिए अम्‍ब्रेला करार भारत सरकार केबिनेट के द्वारा अनुमादित कर दिया गया है। हालांकि, किसी जल विद्युत परियोजना के संबंध में प्रतिबद्ध निधियों के लिए मामले के आधार पर भारत सरकार की केबिनेट की आवश्‍यक है।

Ø  एमईए, भारत सरकार पहले ही खोलोंचू के लिए केबिनेट की मंजूरी सुनिश्‍चित कर चुका है तथा दूसरे स्‍थान पर केबिनेट की मंजूरी की प्रतीक्षा में बुनाखा है।

·         बुनाखा एचईपी की पर्यावरणीय मंजूरी के लिए हाइड्रोपावर एवं पावर सिस्‍टम्‍स (डीएचपीएस) ने राष्‍ट्रीय पर्यावरण आयोग (एनईसी) को बुनाखा एचईपी के ईआईए-ईएमपी और सामाजिक प्रभाव आंकलन अध्‍ययन प्रस्‍तुत कर दिए हैं।

·         दिनांक 31.03.2014 को परियोजना स्‍थल दौरे के बाद एनईसी, भूटान के समक्ष दिनांक 27.03.2014 को ईआईए-ईएमपी अध्‍ययन पर प्रस्‍तुतीकरण के बाद वार्ताओं के कार्यवृत्‍त और ईआईए-ईएमपी पर टिप्‍पणियां 24.04.2014 को प्राप्‍त्‍ हो गई हैं। रिपोर्ट में समाविष्‍ट करने तथा एनआईसी, भूटान की शाही सरकार को अंतिम ईआईए-ईएमपी रिपोर्ट प्रस्‍तुत करने के लिए इन टिप्‍पणियों के उत्‍तर तैयार किए जा रहे हैं।

Ø  राष्‍ट्रीय पर्यावरण आयोग, भूटान द्वारा थिम्‍पु में 25.04.2014 को एक अन्‍य बैठक बुलाई गई थी जिसमें टीएचडीसीआईएल के साथ-साथ भूटान की शाही सरकार के अन्‍य स्‍टेकहोल्‍डर पर्यावरणीय मंजूरी संबंधी मुद्दों पर वार्ता करने के लिए उपस्‍थित हुए। पर्यावरणीय मंजूरी से संबंधित समस्‍त मुद्दों पर वार्ताएं की गई। टीएचडीसीआईएल ने एनईसी से परियोजना की मंजूरी में तेजी लाने का अनुरोध किया है।

Ø  वन मंजूरी के संबंध में भूटान की शाही सरकार के वन विभाग ने डीजीपीसी और टीएचडीसीआईएल के अधिकारियों के साथ  दिनांक 30.04.2014 को परियोजना स्‍थल का दौरा किया ।

·         बुनाखा  एचईपी के लिए अपेक्षित ड्राफ्ट केबिनेट नोट एवं ब्‍याज सब्‍सिडी को अंतिम रूप देने के लिए एमईए, विद्युत मंत्रालय में विचारार्थ है। मई,2014 में आयाजित हुई बैठक में टीएचडीसीआईएल ने विद्युत मंत्रालय को अवगत कराया है कि सीईए द्वारा अंतिम रूप दिए जाने के अनुसार ईजेजी ने अपनी 10वीं बैठक में लागत अंशभागिता तंत्र को अनुमादित कर दिया है और दोनों सरकारों के बीच आईजी करार में औपचारिक रूप से शामिल भी कर दिया है। 

 

·         सीईए ने ब्‍याज सब्‍सिडी और संयुक्‍त पारेषण प्रणाली (एटीएस) के मुद्दे पर और स्‍पष्‍टीकरण मांगे गए थे और इन्‍हें 19.05.2014 को सीईए को प्रस्‍तुत कर दिया गया है । भूटन में विभिन्‍न हाइड्रो इलैक्‍ट्रिक परियोजनाओं के एसोसिएट ट्रांसमिशन सिस्‍टम (एटीएस) पर एक बैठक सदस्‍य (हाइड्रो) सीईए की अध्‍यक्षता में दिनांक 08.08.2014 को हुई थी। बैठक के 12.09.2014 के कार्यवृत्‍त के अनुसार बनाखा एचईपी के एटीएस में लागत हिस्‍से को पिछले रू. 104.0 करोड़ से घटाकर 89.5 करोड़ कर दिया गया है।

·         कार्यान्‍वयन करार पर अप्रैल, 14 में हस्‍ताक्षर किए गए थे। बुनाखा एचर्इपी के लिए अपेक्षित ड्राफ्ट केबिनेट नोट एवं ब्‍याज सब्‍सिडी को विदेश मंत्रालय, विद्युत मंत्रालय के विचारार्थ है। जैसे ही केबिनेट अनुमोदन कर देती है वैसे ही दोनों संयुक्‍त उपक्रम भागीदारों (अर्थात टीएचडीसीआईएल एवं डीजीपीसी) के बीच बुनाखा एचईपी के लिए निर्माण पूर्व गतिविधियां शुरू करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए जाएंगे।

·         पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया के दौरान भूटान की शाही सरकार के राष्‍ट्रीय पर्यावरण आयोग (एनईसी) ने 27.02.2014 को टीएचडीसी इंडिया लि. के प्रस्‍तुतीकरण तथा परियोजना स्‍थल पर संयुक्‍त दौरे के बाद बुनाखा ईआईए-ईएमपी-एसआईए रिपोर्ट पर कुछ प्रश्‍न /टिप्‍पणियां मांगी थीं। एनईसी द्वारा जारी की गई टिप्‍पणियां सभी संबंधित विभागों/ परामर्शदाताओं को अग्रसारित कर दी गई हैं तथा समय से प्रस्‍तुत करने के लिए उनके उत्‍तर तैयार किए जा रहे हैं।

·         एनईसी द्वारा उठाए गए मुद्दों पर परामर्श करने के लिए टीएचडीसीआईएल की भूटान यूनिट ने 12-19 जुलाई,2014 के बीच आईसीएफआरई और भूटान के मछली विशेषज्ञों के पास दौरा किया गया और भूटान की शाही सरकार के सभी उपर्युक्‍त संबंधित विभागों के साथ बैठकें की गई। दौरे के दौरान बुनाखा एचईपी परियोजना क्षेत्र में प्रस्‍तावित बुनाखा परियोजना स्‍थल के अपस्‍ट्रीम एवं डाउनस्‍ट्रीम में वांग्‍चु नदी पर मछली अध्‍ययन किए गए । बुनाखा एचईपी की ईआईए-ईएमपी रिपोर्ट में आईसीएफआरई एवं मछली विशेषज्ञों के द्वारा बुनाखा कार्यस्‍थल के हालिया दौरा करने के निष्‍कर्षों को शामिल किया जाना है और यह दिसंबर, 14 तक पूरा होने की आशा है। उसके बाद, अंतिम ईआईए/ईएमपी रिपोर्ट एनईसी को प्रस्‍तुत की जाएगी।  

·         क्षेत्र सत्‍यापन सर्वेक्षण के लिए वन, जन, संस्‍कृति और भूटानी की मंजूरी लंबित है। इसके लिए चुखा भूटानी प्रशासन पहले ही 7.0 लाख एनयू. के लगभग लागत अनुमान प्रस्‍तुत कर चुका है।

·         डाउनस्‍ट्रीम परियोजनाओं अर्थात चुखा एवं तला एचईपी द्वारा बुनाखा एचईपी के संदर्भ में इक्‍विटी योगदान 13वीं ईजेजी बैठक के दौरान चर्चा की गई थी। शाही सरकार, भूटान द्वारा अपने स्‍वामित्‍व वाले डाउनस्‍ट्रीम परियोजनाओं के लागत हिस्‍से के इक्‍विटी योगदान को भारत सरकार द्वारा यथा अनुदान उपलब्‍ध करवाया जाएगा जिसे राजदूत स्‍तर की बैठक, थिंपू, भूटान में चर्चा की जाएगी।      

·         बुनाखा एचईपी के लिए अंतिम ईआईए एवं ईएमपी रिपोर्ट अवलोकन करने के लिए 28.01.2015 को हाइड्रोपॉवर एवं पावर सिस्‍टम विभाग, विदेश मंत्रालय, भूटान की शाही सरकार, थिम्‍पु को 28.01.2015 को भेज दी गई है।

·         प्राथमिकता के लिए परियोजना स्‍थल गतिविधियां पूरी हो गई हैं। टीएचडीसी इंडिया लि. का भूटान का कार्यालय 30 नवंबर, 2014 से बंद हो गया है।

 

ऊर्जा के अन्य क्षेत्रों में विविधीकरण

 

पवन ऊर्जा पहल:

 

  • ऊर्जा के नवीकरणीय क्षेत्रों में कंपनी के विविधीकरण की और बढ़ते हुए टीएचडीसीआईएल बोर्ड ने पवन ऊर्जा के क्षेत्र में उद्यम करने का अनुमोदन दिया है। तद्नुसार पवन ऊर्जा पौद्योगिकी केंद्र (सी-वैट) को 50 मे.वा. क्षमता के पवन ऊर्जा फार्म के लिए परामर्शदाता नियुक्‍त किया गया है। 
  • 50 मे.वा. पवन फार्म: पतन विंड फार्म स्‍थल के लिए सिंगल बिड गुजरात से प्राप्‍त हो गया है तदनंतर राष्‍ट्रीय पवन ऊर्जा संस्‍थान(एनआईडब्‍ल्‍यूई) द्वारा अंतिम तकनीकी मूल्‍यांकन रिपोर्ट को प्रस्‍तुत करने हेतु वित्‍तीय निविदा को 25.05.15 को खोला गया है। मूल्‍यांकन प्रगति पर है।

 

पवन संसाधन आंकलन अध्‍ययन

 

  • उ.प्र. के शाहजहांपुर जिले में पवन विद्युत संभाव्‍यता के आंकलन के क्रम में बिजौरिया गांव में परियोजना स्‍थल पर 02 मार्च, 2013 को 80 मी. ऊंचे ट्यूबलर पवन निगरानी मस्‍तूल की कमीशनिंग कर दी गई है। वायु आंकड़ा निगरानी कार्य पूरा कर दिया गया है।
  • इसी प्रकार, उ.प्र. के लखीमपुर खीरी जिले में लक्ष्‍मणपुर गांव में पवन विद्युत संभाव्‍यता प्राप्‍त करने के क्रम में लक्ष्‍मणपुर गांव में परियोजना स्‍थल पर 09 मार्च,2014 को 80 मी. उूंचे एक पवन निगरानी मस्‍तुल की कमीशनिंग की जा चुकी है। पवन डाटा निगरानी कार्य प्रगति पर है।

 

सौर ऊर्जा पहल:

 

मध्‍य प्रदेश में: 

  • नई एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, म.प्र. सरकार ने दिनांक 07.09.13 के पत्रांक सं. एनआरई/सोलर/आरएफपी-ii/155/2013/1147 के द्वारा जिला- नीमच (म.प्र.) के चीत्‍खेरा में 20 मे.वा. क्षमता की सौर विद्युत परियोजना आबंटित की है एवं पंजीकरण पत्र जारी किया है। विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) 30.11.2013 को एमपीएनआरई को प्रस्‍तुत कर दी गई है।
  • नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, म.प्र. सरकार ने 17.07.14 जिला- नीमच के चित्‍खेरा में 20 मे.वा. की सौर ऊर्जा परियोजना के टीएचडीसी इंडिया लि. के प्रस्‍ताव/पंजीकरण कार्यान्‍वयन को निरस्‍त कर दिया है। टीएचडीसी पंजीकरण के नवीकरण के लिए मामले को आगे बढ़ा रही है। 

 

उत्‍तर प्रदेश में:

 

  • उ.प्र. के जालौन जिले में ग्रिड संयुक्‍त 100 मे.वा. सौर ऊर्जा परियोजना के कार्यान्‍वयन हेतु यूपीएनईडीए एवं टीएचडीसीआईएल के मध्‍य संयुक्‍त उपक्रम कंपनी के निर्माण के लिए एक समझौता ज्ञापन निष्‍पादित किया जा रहा है।
  • उ.प्र. में जालौन जिले में 100 मे.वा. सौर विद्युत परियोजना स्‍थापित करने के लिए यूपीएनईडीए के साथ संयुक्‍त उपक्रम के निर्माण के लिए यूपीएनईडीए द्वारा सुझाए अनुसार अंतिम रूप देने के लिए पुनरीक्षित ड्राफ्ट एमओयू यूपीएनईडीए को पुन: प्रस्‍तुत कर दिया गया है। मामले का अनुवर्तन उ.प्र. सरकार के साथ किया जा रहा है।

 

केरल में:

·         एसईसीआई केरल राज्‍य विद्युत बोर्ड और टीएचडीसी इंडिया लि. के मध्‍य जिला- कसारागॉड, केरल में 50 मे.वा. सोलर परियोजना के विकास के लिए 31.03.2015 को त्रिपक्षीय करार पर हस्‍ताक्षर हुए। टीएचडीसी इंडिया लि. ने एसईसीआई को रू. 7.165 करोड़ का प्रारंभिक भुगतान अवमुक्‍त कर दिया गया है। केरल सरकार से वांछित भूमि के कब्‍जे के लिए कार्रवाई प्रगति पर है।

 

परामर्श एवं व्‍यापार विकास:

 

  • ओएचपीसी लिमिटेड: ओडिशा हाइड्रो पावर कारपोरेशन लि. (ओएचपीसीएल) के अंतर्गत वर्तमान विद्युत केंद्रों में 03 पम्प स्टोरेज परियोजनाओं के लिए साध्यता पूर्व रिपोर्ट (पीएफआर) पूर्ण हो गई है और अंतिम रिपोर्टें प्रस्‍तुत कर दी हैं।
  • एनडब्‍ल्‍यूडीए: टीएचडीसीआईएल ने दमनगंगा- पिंजल लिंक परियोजना पर भूगाड और खार्गीहिल जल विद्युत परियोजना के विद्युत संभाव्‍यता  और एंड एम अध्ययन पूर्ण कर लिया है और राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी, भारत सरकार को रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है।
  • पर-तापी-नर्मदा लिंक परियोजना के अंतर्गत प्रस्‍तावित 06 विद्युत परियोजनाओं के संदर्भ में विद्युत संभाव्‍यता एवं ई एंड एम अध्‍ययनों को करने के लिए परामर्शी कार्य राष्‍ट्रीय जल विकास एजेंसी (एनडब्‍ल्‍यूडीए) को अवार्ड कर दिया गया है। विद्युत संभाव्‍यता अध्‍ययनों को पूरा कर दिया गया है। ई एंड एम अध्‍ययन प्रगति पर है।   

 

नई परियोजनाओं पर व्यय:

 

मई,2015 तक नई परियोजनाओं पर किया गया व्यय 102.85 करोड़ रूपए है।

 

बजट प्राक्‍कलन बनाम व्यय

 

मई,2015 के दौरान नई परियोजनाओं के लिए 3.20 करोड़ रूपए के पुनरीक्षित बजट अनुमान प्रावधान की तुलना में 1.02 करोड़ रूपए का व्यय किया गया।

 

भारत सरकार से अपेक्षित सहायता

 

·       प्राथमिकता पर खुर्जा एचटीटीपी हेतु कोल लिंकेज ।

·       निवेश-पूर्व गतिविधियों के लिए पीआईबी प्रस्‍ताव की शीघ्र मंजूरी

 

उत्तराखण्ड सरकार से अपेक्षित सहायता

 

टिहरी पीएसपी (1000 मे.वा.)

 

·       08.05.15 को संपन्‍न 7वीं सीसीआई पीएमजी की बैठक में लिए गए निर्णयानुसार टीएचडीसी को असेना खनन के लिए पट्टा के लिए नए सिरे से जिलाधिकारी को अगले तीन दिन के अंतर्गत आवेदन करने की सलाह इस आश्‍वासन के साथ दी गई थी कि जिला प्रशासन मामले को अगले 10 दिन के अंदर प्रक्रिया में लाएगा और पट्टा 31 मई,2015 तक प्रदान किया जाएगा।

·       टीएचडीसी ने असेना खनन के पट्टे के लिए जिलाधिकारी (टिहरी) को 11.05.15 को नया आवेदन प्रस्‍तुत किया।

·       जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा यह अवगत कराया गया कि मामले को राज्‍य खनन विभाग, उत्‍तराखंड सरकार को स्‍वीकृति के लिए 18.05.2015 को अग्रसारित कर दिया गया है।

·       उत्‍तराखंड सरकार/जिलाधिकारी(टिहरी) द्वारा पट्टा अभी तक नवीकृत नहीं किया गया है।

·       जिला प्रशासन से 150 टीपीएच क्रशिंग प्‍लांट का अवधित संस्‍थापन और प्रतिदिन खनन प्रचालन के लिए आवश्‍यक सहयोग की भी आवश्‍यकता है।

 

एचईपी (444 मे.वा.)

 

·         स्‍थानीय लोगों द्वारा कार्य में अवरोध उत्‍पन्‍न करने से रोकने के लिए जिला प्रशासन से सहायता की आवश्‍यकता है।

 

टिहरी बांध एवं एचपीपी (1000 मे.वा.)

 

·       प्रमुख सचिव, उत्‍तराखंड सरकार की अध्‍यक्षता में दिनांक 03.09.2014 को हुई बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार सभी अपेक्षित उपायों / कार्रवाईयों के अनुपालन के बाद ईएल 830.0 मी. तक जलाशय भरने की औपचारिक अनुमति की प्रतीक्षा है।

 

कोटेश्‍वर एचईपी (400 मे.वा.)

 

·       कोटेश्‍वर परियोजना के चारों और निषिद्ध क्षेत्र घोषित करना।

 

 

 

 
             
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