कंपनी
अभिदृष्टि/मिशन
उद्देश्य
निदेशक मंडल
बोर्ड उप समिति
प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक
संगम ज्ञापन एवं अनुच्छेद
बारंबार पूछे गये प्रश्न

टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड भारत सरकार एवं उ.प्र. सरकार का एक संयुक्‍त उपक्रम है । भारत सरकार एवं उ.प्र. सरकार के मध्‍य इक्‍विटी अंशभागिता 75:25 के अनुपात में है। कंपनी का गठन जुलाई, 1988 में 2400 मेगावाट के टिहरी हाइड्रो पावर कॉम्पलैक्स तथा अन्य जल विद्युत परियोजनाओं के विकास, परिचालन एवं अनुरक्षण के लिए किया गया था। कंपनी की प्राधिकृत शेयर पूंजी 4000 करोड़ रुपये है । टीएचडीसीआईएल मिनी रत्‍न  श्रेणी-1 एवं अनुसूची ‘ए’ सीपीएसई है ।

                                                                        

टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड का प्रारंभिक अधिदेश 2400 मेगावाट  टिहरी हाइड्रो  पावर काम्‍पलैक्‍स (1000 मे.वा. टिहरी बांध एवं एचपीपी,  1000 मेगावाट टिहरी पंप स्‍टोरेज प्‍लांट  एवं 400 मेगावाट कोटेश्‍वर एचईपी सहित) तथा अन्‍य जल विद्युत परियोजनाओं  के विकास, प्रचालन एवं अनुरक्षण के लिए था ।

 

वर्तमान में टीएडीसी इंडिया लिमिटेड की कुल संस्‍थापित क्षमता 1513 मेगावाट है ।  टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के पास दो उत्‍पादन केंद्र नामत: टिहरी चरण-1 (4 x 250 मेगावाट) एवं कोटेश्‍वर एचईपी (4 x 100 मेगावाट) तथा पाटन, गुजरात में एक पवन विद्युत परियोजना (25 x 2 मेगावाट) एवं दूसरी पवन विद्युत परियोजना (30 x 2.1 मेगावाट ) देवभूमि द्वारका में   हैं ।

 

भागीरथी घाटी से बाहर की परियोजनाओं की वर्तमान व्यापार वास्तविकता को दर्शाने के लिए कंपनी के मेमोरेंडम एवं आर्टिकल ऑफ एसोशिएशन में संशोधन किया गया है। कंपनी के उद्देश्‍य खंड में परंपरागत/गैर परंपरागत/ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों तथा नदी घाटी परियोजनाओं का विकास शामिल करते हुए संशोधन किया गया है।

 

निगम विभिन्‍न राज्‍यों के साथ-साथ पड़ोसी देश भूटान  में फैली हुई परियोजनाओं के साथ एक बहुउद्देशीय  परियोजना संगठन के रुप में आगे बढ़ रहा है ।

 

टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड  के पास वर्तमान में  कुल संस्‍थापित क्षमता  6374 मेगावाट की  18 परियोजनाएं कार्यावन्‍यन/विकास  के विभिन्‍न चरणों  के अधीन हैं ।

 

टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड  के द्वारा 1000 मेगावाट टिहरी विद्युत स्‍टेशन वर्ष 2006-07 में चालू किया गया था।  टिहरी परियोजना एक बहुददेशीय परियोजना है जो उत्‍तरी क्षेत्र को विद्युत उपलब्‍ध कराने के साथ-साथ उत्‍तर प्रदेश राज्‍य को सिंचाई तथा दिल्‍ली राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उत्‍तर प्रदेश को जलापूर्ति करा रही है ।  टिहरी जलाशय से पानी की नियमित निकासी के कारण  राज्‍य में इसके डाउनस्‍ट्रीम में स्‍थित जल विद्युत परियोजनाएं भी बिना किसी  अतिरिक्‍त लागत के जल विद्युत उत्‍पादन में वृद्धि के माध्‍यम से लाभान्‍वित हो रही हैं ।

 

वर्ष 2011-12 में  टिहरी के निचले हिस्‍से में  400 मेगावाट कोटश्‍वर, एचईपी से  उत्‍पादन शुरु किया गया था ।  1000 मेगावाट टिहरी पंप स्‍टोरेज  सयंत्र जो कि अभी निर्माणाधीन है  वह  टिहरी और कोटेश्‍वर जलाशयों का उपयोग ऊपरी और निचले जलाशय के रुप में करेगा ।

 

2400 मेगावाट टिहरी हाइड्रो  काम्‍पलेक्‍स के अलावा, टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड उत्‍तराखंड में अलकनंदा नदी पर 444 मेगावाट विष्‍णुगाड पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना का कार्यान्‍वयन  कर रही है। टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड उत्‍तर प्रदेश में बेतवा नदी पर  24 मेगावाट ढुकवां लघु जल विद्युत परियोजना का भी कार्यान्‍वयन कर रही है ।  इसके अलावा,  टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड  की विभिन्‍न जल विद्युत परियोजनाएं सर्वेक्षण एवं अन्‍वेषण /डीपीआर तैयार करने के अध्‍यधीन हैं ।

 

टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड, वर्ष 2006-07 से टिहरी बांध एवं एचपीपी की कमीशनिंग के साथ ही लगातार लाभ अर्जित करने वाली कंपनी है ।

 

उत्‍तर प्रदेश सरकार ने टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड को बुलंदशहर  जिले में  खुर्जा सुपर थर्मल पावर प्‍लांट (2 x660 मेगावाट)  कार्यान्‍वयन हेतु आबंटित किया है ।

नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में कंपनी के विविधीकरण के लिए टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड ने  जून,2016 में गुजरात के जिला पाटन में 50 मेगावाट  की पवन विद्युत परियोजना एवं मार्च, 2017 में देवभूमि द्वारका में 63 मेगावाट की पवन विद्युत परियोजना कमीशन कर दी है। टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड ने 250 मेगावाट  क्षमता की ग्रिड संयोजित सौर ऊर्जा परियोजनाओं की स्‍थापना के लिए सोलर इनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ  इंडिया (एसईसीआई) के साथ  समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए हैं ।  टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड ने  केरल के जिला कसारागॉड में 50 मेगावाट सौर परियोजना के विकास के लिए एसईसीआई और केरल राज्‍य बिजली बोर्ड के साथ एक त्रिपक्षीय करार पर भी हस्‍ताक्षर किए हैं ।

 

जल विद्युत विकास के क्षेत्र में भारत - भूटान  सहयोग के तहत, टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड एक संयुक्‍त उपक्रम के रुप में बुनाखा एचईपी (180 मेगावाट) के कार्यान्‍वयन  में जुटी है ।  कंपनी ने परामर्श कार्य के तौर पर  भूटान में  संकोश एचईपी (2585 मेगावाट) के डीपीआर को अद्यतन करने का कार्य भी लिया है ।

टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड को टिहरी बांध परियोजना की अद्वितीय परिकल्‍पना एवं निर्माण विशेषताओं को देखते हुए इंटरनेशनल कमीशन ऑफ लार्ज डैम (आईकोल्‍ड) के द्वारा चीन में अक्‍टूबर, 09 में ''इंटरनेशनल माइलस्‍टोन प्रोजेक्‍ट'' का प्रतिष्‍ठित पुरस्‍कार प्रदान किया गया। कोटेश्‍वर एचईपी को 2011-12 के लिए लंबी अवधि की परियोजनाओं ( 03 वर्षों से अधिक) की श्रेणी में  ‘पीएमआई  इंडिया बेस्‍ट  प्रोजेक्‍ट अवार्ड’ प्रदान किया गया ।  कोटेश्‍वर एचईपी ने अति प्रतिष्‍ठित ''पांचवा सीआईडीसी विश्‍वकर्मा पुरस्‍कार-2013'' भी जीता है । परियोजना को इस श्रेणी में सभी क्षेत्रों से 70 से भी अधिक आवेदनों में से ''सर्वश्रेष्‍ठ निर्माण परियोजना'' की श्रेणी में विजेता चुना गया । टीएचडीसीआईएल को मई ,2012 में माननीय केंद्रीय विद्युत मंत्री  द्वारा बेस्‍ट परफॉर्मिंग जेनरेशन कंपनी (जल विद्युत क्षेत्र में) की श्रेणी में पावर लाइन अवार्ड प्रदान किया गया है।  टीएचडीसी को अप्रैल,2012 में कारपोरेट सामाजिक जबाबदेही  एवं उत्‍तरदायित्‍व के लिए स्‍कोप मैरीटोरियस अवार्ड,2015 प्रदान किया गया । टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड (टीएचडीसीआईएल) को संस्‍थागत श्रेणी- ।। (मिनी रत्‍न । एवं ।। पीएसई) में सार्वजनिक क्षेत्र प्रबंधन में उत्‍कृष्‍ट  योगदान  के लिए प्रतिष्‍ठित  ‘’स्‍कोप अवार्ड फॉर एक्‍सलेंस’’ के तहत स्‍वर्ण ट्राफी से नवाजा गया है । टिहरी हाइड्रो पॉवर प्‍लांट (1000 मेगावाट) को सेंट्रल बोर्ड ऑफ इरीगेशन एवं पावर (सीबीआईपी) ने 29 दिसंबर,2016 को सर्वश्रेष्‍ठ अनुरक्षित परियोजना का पुरस्‍कार प्रदान किया गया है ।

 

टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड ने कारपोरेट कार्यालय, ऋषिकेश, टिहरी एचपीपी, टिहरी पीएसपी, कोटेश्‍वर एचईपी तथा विष्‍णुगाड पीपलकोटी एचईपी के लिए आई.एस.ओ. 9001:2008 गुणवत्‍ता प्रबंधन प्रणाली,  आई.एस.ओ. 14001-2004 प्रमाणन (पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली) तथा  आईएसओ 18001: 2007( व्‍यावसायिक स्‍वास्‍थ्‍य तथा सुरक्षा प्रबंधन व्‍यवस्‍था) का प्रमाणन प्राप्‍त कर लिया है।

 

 

 
             
Site Designed & Developed by IT Department, THDC, Rishikesh.