श्री डी.वी. सिंह ने टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक का कार्यभार ग्रहण किया

ऋषिकेश, 01 दिसम्‍बर, 2016 : श्री धीरेन्‍द्र वीर सिंह ने आज टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड (टीएचडीसीआईएल) के अध्‍यक्ष एवं प्रबन्‍ध निदेशक के तौर पर कार्यभार ग्रहण कर लिया है। भारत में हाइड्रो पावर उत्‍पादन के क्षेत्र में टीएचडीसी एक प्रमुख उपक्रम है। वर्तमान में इसकी कुल संस्‍थापित क्षमता 1450 मेगावाट है। अध्‍यक्ष एवं प्रबन्‍ध निदेशक का कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व श्री डी.वी. सिंह टीएचडीसी में निदेशक (तकनीकी) के पद का दायित्‍व निर्वाह कर रहे थे। अध्‍यक्ष एवं प्रबन्‍ध निदेशक के तौर पर उनका कार्यकाल 30 अप्रैल, 2021 तक होगा।

 

टीएचडीसीआईएल एक मिनी-रत्‍न.. कटेग्री प्रथम, शेडयूल उपक्रम है तथा इसके पास वर्तमान में कुल 18 परियोजनाएं हैं जिसकी कुल संस्‍थापित क्षमता 6374 मेगावाट है। ये परियोजनाएं विकास के विभिन्‍न चरणों में हैं।

टिहरी बांध परियोजना टीएचडीसीआईएल की प्रमुख धरोहर है तथा यह एक बहुउदे्श्‍यीय परियोजना है। इस परियोजना से उत्‍तरी ग्रिड में 1000 मेगावाट विद्युत उत्‍पादन के साथ ही उत्‍तर प्रदेश में 8.74 लाख हैक्‍टेयर भूमि की सिंचाई तथा 200 क्‍यूसेक्‍स पेयजल उत्‍तर प्रदेश तथा 300 क्‍यूसेक्‍स राजधानी दिल्‍ली की जनसंख्‍या को उपलब्‍ध कराया जाता है।

 

रिन्‍यूबल इनर्जी के प्रति भारत सरकार के विशेष रूझान को ध्‍यान में रखकर टीएचडीसीआईएल ने पवन व सौर ऊर्जा उत्‍पादन के लिए अपने कार्यक्षेत्र में विविधीकरण किया है। गुजरात के पाटन जिले में 50 मेगावाट पवन ऊर्जा की कमीशनिंग कॉरपोरेशन द्वारा पहले ही किया गया है और केरल के कासरगाड में 50 मेगावाट सौर ऊर्जा के विकास पर कार्य चल रहा है। गुजरात के द्वारिका जिले में 63 मेगावाट पवन ऊर्जा को भी अवार्ड किया गया है।

 

श्री सिंह ने ऐसे कठिन दौर में पदभार ग्रहण किया है, जबकि कम्‍पनी हाइड्रो पावर के क्षेत्र में अपनी स्‍थिति को मजबूत करने में जुटी है तथा विस्‍तृत रिन्‍यूबल इनर्जी में रिक्‍त स्‍थान को भरने का दृष्‍टिकोण अपनाना जरूरी है। श्री सिंह ने टीएचडीसी में दो दशकों से भी अधिक व्‍यावसायिक यात्रा पूर्ण की है, ऐसे में यह नया उत्‍तरदायित्‍व उनके लिए सम्‍मान की बात है। कार्यभार ग्रहण करने के अवसर पर श्री डी.वी. सिंह ने कहा- अध्‍यक्ष एवं प्रबन्‍ध निदेशक के तौर पर मेरा उद्देश्‍य होगा कि टीएचडीसीआईएल एक उत्‍तरदायी संस्‍थान के तौर पर हाइड्रो पावर के विकास में लगातार अग्रसर रहे और हम नये व्‍यवसायों के प्रति भी सत्‍तत केन्‍द्रित रहेंगे।

 

श्री सिंह नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी (एन.आई.टी.) राऊरकेला (1983) से सिविल अभियांत्रिकी में स्‍नातक हैं। उन्‍हें भूमिगत कार्यों, पावर हाउस के कार्यों, स्‍पिलवे, संविदाओं, सामाग्री प्रबन्‍धन, पुनर्वास और सिविल के बड़े निर्माण कार्यों के संबंध में तीन दशकों से भी अधिक कार्य करने का अनुभव है। टीएचडीसी में नियुक्‍ति से पूर्व श्री सिंह ने लार्सन एवं टोबरो में अनेक महत्‍वपूर्ण पदों पर कार्य किये हैं।

 

श्री सिंह ने टिहरी पावर हाउस  के निर्माण में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है। वे इस परियोजना के नियोजन एवं निर्माण के प्रभारी भी रहे। टिहरी परियोजना के स्‍पिलवे प्रावधानों के साथ-साथ संविदा, सामग्री प्रबन्‍धन, भवन व सड़क निर्माण कार्यों में भी श्री सिंह ने सक्रिय भूमिका निभाई है। वे परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास व पुर्नस्‍थापन कार्यों से भी जुड़े रहे।

 

कोटेश्‍वर परियोजना को दक्षता से कार्यान्‍वित करने के लिए राष्‍ट्रीय स्‍तर के अनेक पुरस्‍कार प्राप्‍त हुए हैं। श्री सिंह को आई.आई.टी. रूड़की में इंस्‍टीट्यूशन्‍स आफ इंजीनियर्स (इंडिया) के नेशनल कनवेन्‍शन के दौरान “Imminent Engineering Personality” का सम्‍मान तथा इसी संस्‍थान से “Chartered Engineer” सम्‍मान प्राप्‍त हुआ है।

 

 
             
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