कम्पनी
अभिदृष्टि/मिशन
उद्देश्य
निदेशक मंडल
संस्था बहिर्नियम

कम्पनी

 

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

 

प्रारंभ में टिहरी बांध एवं हाइड्रो इलैक्ट्रिक परियोजना को उ.प्र. सरकार द्वारा 600 मेगावाट संस्थापित उत्पादन क्षमता के कार्यान्वयन के लिए योजना आयोग द्वारा जून, 1972 में पूंजी निवेश की स्वीकृति प्रदान की गई थी। राज्य सरकार के द्वारा परियोजना का 1978 में निर्माण कार्य शुरू किया गया था। बाद में 1983 में राज्य सरकार द्वारा परियोजना की प्रस्तावित संस्थापित उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 1000 मेगावाट कर दिया गया था।

 

राज्य क्षेत्र में परियोजना के कार्यान्वयन के लिए फंड की कमी के मद्देनजर नवम्बर,1986 में निवर्तमान  यू.एस.एस.आर. के वित्तीय एवं तकनीकी सहायता से भारत सरकार एवं राज्य सरकार के एक संयुक्त उपक्रम के रूप में टिहरी परियोजना को कार्यान्वित करने का निर्णय लिया गया।

 

नवम्बर,1986 में भारत सरकार एवं यू.एस.एस.आर. सरकार के मध्य आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ, 2400 मेगावाट टिहरी हाइड्रो पावर काम्पलैक्स के अंतर्गत 1000 मेगावाट टिहरी बांध एवं हाइड्रो पावर प्लांट, 400 मेगावाट कोटेश्वर बांध एवं 1000 मेगावाट टिहरी पम्प स्टोरेज प्लांट का निर्माण सम्मिलित है। इस अनुबंध में यू.एस.एस.आर. से 1000 मिलियन रूबल राशि  की साख के रूप में वित्तीय सहायता पर विचार किया गया था।

 

टिहरी पावर काम्पलैक्स के कार्यान्वयन के लिए तत्कालीन यू.एस.एस.आर. से वित्तीय एवं तकनीकी सहायता लेने के लिए भी सरकार द्वारा अनुमोदन प्रदान कर दिया गया था। तथापि, यू.एस.एस.आर. के विघटन के बाद यू.एस.एस.आर. से वित्तीय सहायता उपलब्ध नहीं हो पायी थी।

 

निगम के बारे में

 

टीएचडीसी को भारत सरकार एवं उ.प्र.सरकार के एक संयुक्त उपक्रम के रूप में जुलाई, 1988 में कम्पनी अधिनियम, 1956 के अंतर्गत टिहरी जल विद्युत परियोजना एवं  अन्य जल विद्युत परियोजनाओं के विकास, परिचालन एवं अनुरक्षण के लिए निगमित किया गया था इनके कार्य टीएचडीसी को जून, 1989 में सौंपे गए थे।

 

परियोजना के इक्विटी भाग में भारत सरकार एवं उ.प्र.सरकार का 75:25  के अनुपात में हिस्सा है।

 

निगम की प्राधिकृत शेयर पूंजी 4000 करोड़ रूपए है।

 

मार्च, 1994 में सरकार द्वारा टिहरी पम्प स्टोरेज प्लांट के आवश्यक कार्यों तथा कोटेश्वर एचईपी के प्रतिबद्ध कार्यों के साथ टिहरी बांध एवं हाइड्रो पावर प्लांट प्रथम चरण (1000मे.वा.) के कार्यान्वयन की अनुमति प्रदान की गई। टिहरी पावर कॉम्पलैक्स के अन्य घटकों, जैसे कोटेश्वर परियोजना एवं पम्प स्टोरेज प्लांट का निर्माण कार्य बाद के चरण में शुरू करने की परिकल्पना की गई थी।

 

 

सरकार द्वारा अप्रैल,2000 में कोटेश्वर एचईपी (400 मे.वा.) के कार्यान्वयन की अनुमति प्रदान की गई थी।

 

सरकार द्वारा जुलाई, 2006 में केन्द्रीय क्षेत्र की प्रथम पम्प स्टोरेज योजना टिहरी पीएसपी (1000 मे.वा.) को निवेश अनुमोदन प्रदान किया गया है, जो टिहरी एवं कोटेश्वर जलाशयों को आवश्यक अपस्ट्रीम एवं डाउनस्ट्रीम जलाशय के रूप में प्रयोग करेगा।

 

भारत सरकार ने अगस्त, 2008 में अलकनंदा नदी पर 444 मे.वा. विष्णुगाड पीपलकोटी हाइड्रो इलैक्ट्रिक परियोजना(वीपीएचईपी) के कार्यान्वयन हेतु निवेश अनुमोदन प्रदान कर दिया है।

 

उत्तराखण्ड सरकार ने भी टीएचडीसी को उत्तराखण्ड में भगीरथी, अलकनंदा एवं शारदा घाटी में कुल 760मे.वा. की जल विद्युत परियोजनाएं सौंपी हैं।

 

उत्तराखण्ड सरकार ने टोंस नदी, जो यमुना नदी की बड़ी सहायक नदी है, पर बहुउद्देशीय किशाऊ परियोजना (600मे.वा.) के आवंटन हेतु भी सिद्धान्ततः अनुमोदन प्रदान कर दिया है। भारत सरकार ने टीएचडीसी द्वारा परियोजना की डीपीआर अद्यतन किए जाने हेतु अनुमोदन प्रदान कर दिया है।

 

देश में पम्प स्टोरेज योजनाओं सहित जल विद्युत परियोजनाओं के विकास हेतु उनकी सुदृढता तथा क्षमता की सहभागिता के लिए टीएचडीसी ने न्यूक्लियर पावर कारपोरेशन लि.(एनपीसीआईएल) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है। महाराष्ट्र सरकार ने टीएचडीसी एवं एनपीसीआईएल के संयुव्त उपक्रम को दो पीएसपी नामतः मालशेज घाट(600 मे.वा.) तथा हुम्बर्ली (400मे.वा.) की डीपीआर अद्यतन करने एवं तदनंतर कार्यान्वयन हेतु आवंटित की हैं जो वाणिज्यिक व्यवहार्यता के अध्यधीन है।

 

हाइड्रो सेक्टर के विकास के क्षेत्र में भारत एवं भूटान सहयोग के तहत, विद्युत मंत्रालय ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को अद्यतन करने एवं तदनंतर भूटानी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के साथ अंतर्सरकारी प्राधिकरण मॉडल/संयुव्त उपक्रम के आधार पर कार्यान्वयन हेतु भूटान में दो परियोजनाएं नामतः संकोश एचईपी (4060मे.वा.) तथा बुनाखा एचईपी(180 मे.वा.) आवंटित की हैं। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के अद्यतन का कार्य शुरू किया जा चुका है।

 

टीएचडीसी उत्तराखण्ड सरकार द्वारा सौंपे गए उत्तरकाशी में वरूणावत पर्वत के स्थिरीकरण कार्य हेतु अभियांत्रिकीय परामर्शी कार्य भी कर रहा है। कार्यों में पहाड़ियों के स्थिरीकरण की बड़ी समस्या को पूर्ण अभियांत्रिकीय समाधान उपलब्ध कराना तथा परियोजना कार्यस्थल पर निष्पादन कार्यों का पर्यवेक्षण करना शामिल है।

 

निगम ने 10वीं योजना के दौरान टिहरी बांध एवं एचपीपी चरण- (1000 मे.वा.) की कमीशनिंग कर दी है। टिहरी पावर स्टेशन अब पूर्णतः प्रचालन में है।

 

 
             
Site Designed & Developed by IT Department, THDC, Rishikesh.