श्री धीरेन्द्र वीर सिंह ने टीएचडीसी इण्डिया लिमिटेड में निदेशक (तकनीकी) का कार्यभार संभाल लिया है। एन.आई.टी, राउरकेला से सिविल इंजीनियरिंग में ऑनर्स के साथ प्रथम श्रेणी में डिग्री लेकर उनका एल एण्ड टी में कैम्पस सेलेक्शन हुआ। 1983 से 1992 तक एल एण्ड टी में कार्य करने के बाद जुलाई 1992 में उनका चयन टीएचडीसी में हुआ। एल एण्ड टी में उन्होंने एनटीपीसी व इण्डो गल्फ फर्टीलाइजर तथा स्कोप के महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया।
निदेशक (तकनीकी) के पद ग्रहण करने से पहले वे टीएचडीसी में अतिरिक्त महाप्रबन्धक के पद पर रहते हुए कोटेश्वर जैसी महत्वपूर्ण परियोजना में अतिरिक्त शक्तियों के साथ मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे। मार्च 2007 से उन्होंनें टीएचडीसी के एक दूरदर्शी निर्णय के तहत 2002 से रूग्ण कोटेश्वर परियोजना को उन्होंने वापस ट्रैक पर लाकर परियोजना के निर्माण कार्य को गति दी। इस महत्वपूर्ण कार्य करने के लिए उन्हें अतिरिक्त ताकत दी गयी, ताकि परियोजना का कार्य बिना उलझन के पूरा किया जा सके। जिसे उन्होंने बखूबी निभाया और आज संभवतः परियोजना दिसम्बर, 2010 तक कमीशन की जा सकेगी
इससे पहले उन्होंने देश की बहुउद्देश्यी परियोजना टिहरी बांध के सभी सिविल कार्यों को अपैल, 2004 से अप्रैल, 2007 तक निभाया तथा साथ ही पावर हाउस (4X250) के निर्माण व योजना के कार्यें को भी अंजाम दिया। उनकी देखरेख में टिहरी एच.पी.पी. के टी-3, टी-4 टनलों की कनक्रीटिंग स्पिलवे डिजाइन व अन्य कार्य भी पूरे हुए।
देश की महत्वपूर्ण परियोजनाओं के निर्माण में श्री सिंह को विद्युत, मैकेनिकल, हाइड्रो मैकेनिकल एवं पावर हाउस के क्षेत्र में लगभग 20 वर्षों का वृहद कार्य अनुभव है।
श्री सिंह को प्रबन्धन द्वारा कैलीफोर्निया, यू.एस.ए.में हाइड्रो विजन 2008 में दो सप्ताह के सेमीनार में भाग लेने तथा डैम डिजाइनिंग व पावर हाउस सिविल वर्क में 8 सप्ताह की टेनिंग हेतु मास्को, रूस भेजा गया।